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हड्डी के अस्पताल में हो रहा था ब्रेन हैमरेज का इलाज? चहनिया में महिला की मौत के बाद हंगामा व पुलिस लाठीचार्ज

चहनिया के एक निजी अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल महिला की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। आरोप है कि अस्पताल ने नियमों के विरुद्ध इलाज किया और पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया।

 

महिला की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा

अवैध चिकित्सालयों पर प्रशासन की चुप्पी

पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का गंभीर आरोप

मासूम बच्चों के सिर से उठा माँ का साया

चंदौली जनपद अंतर्गत चहनिया (बलुआ थाना क्षेत्र) में एक निजी अस्पताल की कथित लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं। सड़क दुर्घटना में घायल हुई 30 वर्षीय विवाहिता पूनम मौर्या की इलाज के दौरान मौत के बाद क्षेत्र में जबरदस्त तनाव व्याप्त है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर जानबूझकर गलत इलाज करने और समय पर रेफर न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद जब आक्रोशित ग्रामीण और परिजन जवाब मांगने अस्पताल पहुँचे, तो वहां पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई, जिसमें पुलिस पर लाठीचार्ज करने के आरोप भी लगे हैं।

Chandauli private hospital medical negligence

दुर्घटना से अस्पताल तक का दुखद घटनाक्रम 
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को महेशी निवासी पूनम मौर्या अपने भाई बालेन्द्र के साथ बाइक से ससुराल तारगांव जा रही थीं। रास्ते में बाइक फिसलने से पूनम के सिर में गंभीर चोट आई। परिजनों ने उन्हें चहनिया स्थित मातृशक्ति चिकित्सालय में भर्ती कराया। रविवार को डॉक्टरों ने सीटी स्कैन के लिए उन्हें वाराणसी भेजा, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद उन्हें वापस चहनिया बुला लिया गया। परिजनों का आरोप है कि पूनम की हालत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अपनी कमाई के चक्कर में न तो समुचित इलाज किया और न ही उन्हें किसी बड़े सेंटर के लिए रेफर किया। सोमवार सुबह इलाज के अभाव में पूनम ने दम तोड़ दिया।

हड्डी के अस्पताल में ब्रेन हैमरेज का 'अवैध' इलाज? 
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य अस्पताल के पंजीकरण को लेकर सामने आया है। ग्रामीणों और परिजनों का दावा है कि मातृशक्ति चिकित्सालय केवल 'हड्डी रोग विशेषज्ञ' (Orthopedic) केंद्र के रूप में पंजीकृत है। इसके बावजूद, अस्पताल के संचालकों ने ब्रेन हैमरेज जैसे जटिल और संवेदनशील मामले को अपने हाथ में लिया। आरोप है कि विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के बावजूद मरीज को घंटों रोके रखा गया, जो अंततः मौत का कारण बना। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं कि आखिर किस आधार पर ऐसे अस्पताल क्षेत्र में बिना विशेषज्ञों के गंभीर रोगों का इलाज कर रहे हैं।

पुलिस की कार्यशैली से ग्रामीणों का आक्रोश 
मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने न्याय की मांग की, तो मौके पर पहुँची पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन पर लाठियां भांजी और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। क्षेत्र में चर्चा है कि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी और पुलिस की मिलीभगत से निजी अस्पतालों का सिंडिकेट फल-फूल रहा है। इससे पहले भी इसी तरह की घटनाओं को दबाने के आरोप लगते रहे हैं। मृतका अपने पीछे 6 वर्ष और ढाई वर्ष के दो मासूम बच्चों को छोड़ गई है, जिनका अपनी माँ को खोने के बाद रो-रोकर बुरा हाल है।

मामले में जाँच और कार्रवाई का भरोसा
 मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी रितेश कुमार ने बताया कि अस्पताल के पंजीकरण और इलाज के आधार की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हड्डी रोग के नाम पर ब्रेन हैमरेज का इलाज करने की पुष्टि होती है, तो अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। वहीं बलुआ थाना प्रभारी अतुल प्रजापति ने लाठीचार्ज के आरोपों को नकारते हुए कहा कि पुलिस केवल स्थिति को नियंत्रित कर रही थी और तहरीर मिलने पर मामले में निष्पक्ष जाँच की जाएगी।

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