चंदौली सदर तहसील: शिलान्यास के बाद भी नहीं बना डीलक्स शौचालय, अधिवक्ता ने खोला मोर्चा, कमीशनखोरी का आरोप
चंदौली सदर तहसील में डीलक्स शौचालय का निर्माण न होने पर अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक के नेतृत्व में वकीलों ने प्रदर्शन कर विधायक निधि के दुरुपयोग और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए।
चंदौली जिले की सदर तहसील में डीलक्स शौचालय के निर्माण को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक के नेतृत्व में तहसील परिसर में वकीलों ने जमकर प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि करीब एक वर्ष पूर्व मुगलसराय के विधायक रमेश जायसवाल द्वारा जिस डीलक्स शौचालय का शिलान्यास किया गया था, उसका निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है।
'नींव से ज्यादा नेम प्लेट पर हुआ खर्च'
प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मुगलसराय विधानसभा में 'विकास की गंगा' बहाने का दावा करने वाले विधायक ने अधिवक्ताओं के साथ धोखा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीलक्स शौचालय के नाम पर केवल नींव खोदी गई और खानापूर्ति की गई। संतोष पाठक ने कटाक्ष करते हुए कहा, "शौचालय की नींव बनाने में जितना धन खर्च नहीं हुआ, उससे कहीं ज्यादा पैसा विधायक जी की नेम प्लेट और बोर्ड लगाने में फूँक दिया गया।"
भ्रष्टाचार की जांच और धन का हिसाब मांगने की मांग
अधिवक्ताओं का कहना है कि पूरे जिले में सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधायक निधि से शौचालय के लिए जो धन आवंटित किया गया था, वह आखिर कहाँ चला गया? अधिवक्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आवंटित धन का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही शौचालय का निर्माण पूर्ण नहीं कराया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे ताकि वकीलों को दैनिक उपयोग के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा मिल सके।
प्रदर्शन में शामिल रहे प्रमुख अधिवक्ता
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। संतोष कुमार पाठक एडवोकेट के साथ लक्ष्मण तिवारी, अनंत सिन्हा, शरद यादव, मुकेश कुमार, ललित शर्मा, अभिषेक और विनोद राठौर सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने एक स्वर में व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया। तहसील परिसर में हुआ यह प्रदर्शन न केवल शौचालय की कमी को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण कार्यों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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