विंध्य एक्सप्रेसवे के इस प्लान को चंदौली में फूटा है किसानों का गुस्सा, कृषि भूमि बचाने के लिए और तेज होगा आंदोलन
उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत मीर्जापुर, गाजीपुर और चंदौली के 158 गांवों में भूमि अधिग्रहण सर्वे पूरा हो गया है। उचित मुआवजा न मिलने से किसान अब आंदोलन पर उतर आए हैं।
तीन जिलों के गांवों में सर्वे पूरा
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
चौबीस हजार करोड़ की भारी अनुमानित लागत
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसान आंदोलन
पुराने सर्किल रेट पर नाराजगी और विरोध
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित महत्वाकांक्षी परियोजना 'विंध्य एक्सप्रेसवे' को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हलचल काफी तेज हो गई है। इस बेहद महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की बड़ी तैयारी है। इसके लिए मीर्जापुर, गाजीपुर और चंदौली जनपद के कुल 158 गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसकी प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत सर्वे का कार्य अब लगभग पूरा कर लिया गया है।
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को सौंपी गई है। यूपीडा की ओर से अधिकृत 'अलमंड कंपनी' की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कार्य करीब-करीब पूरा कर लिया है। अब इस सर्वे के सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए पूरी सूची राजस्व विभाग को भेजी जाएगी। राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद ही स्थानीय किसानों की आपसी सहमति से भूमि की खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

जानिए क्या है विंध्य एक्सप्रेसवे रूट का पूरा गणित
विंध्य एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। इस छह लेन वाले एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 320 किलोमीटर निर्धारित की गई है, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। यह मुख्य रूट प्रयागराज (जुड़ापुर दांदू) से शुरू होकर मीर्जापुर, चंदौली और सोनभद्र तक जाएगा। इसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 22,400 करोड़ रुपये तय की गई है।
इस मुख्य एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक अलग लिंक मार्ग का निर्माण भी कराया जाएगा, जिसकी लंबाई 116 किलोमीटर बताई जा रही है। सर्वे करने वाली कंपनी के अधिकारी वीके पांडे ने स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से रूट एवं नक्शा पूरी तरह से तय कर लिया गया है। इस परियोजना के तहत चंदौली में 52 गांव, गाजीपुर में 65 गांव और मीर्जापुर के 41 गांवों की जमीन ली जाएगी। अकेले चंदौली जनपद की बात करें, तो यहाँ की दो तहसीलों की 52 ग्राम पंचायतें इससे सीधे तौर पर प्रभावित होंगी।

भूमि अधिग्रहण पर किसानों का आंदोलन होगा तेज
एक तरफ जहाँ प्रशासन इस परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की कोशिश में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ चंदौली जिले में इसे लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया है। विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर स्थानीय किसान पूरी तरह आंदोलित हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का साफ कहना है कि यह पूरा इलाका कृषि प्रधान है और यहां के लोगों के जीवनयापन का एकमात्र सहारा उनकी उपजाऊ खेती ही है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के निर्माण से उनकी कीमती कृषि भूमि हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
किसानों की नाराजगी की एक बड़ी वजह मुआवजे की रकम भी है। आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उनकी जमीनों का उचित और वर्तमान बाजार मूल्य नहीं दिया जा रहा है। शासन की ओर से उन्हें तीन साल पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा देने की बात कही जा रही है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। किसानों के इस उग्र विरोध को देखते हुए शासन और जिला प्रशासन ने भी मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग की ओर से सर्किल रेट जारी करते हुए प्रभावित लोगों से उनकी आपत्तियां मांगी गई हैं, ताकि आपसी संवाद से इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जा सके।
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