बुनकर के बेटे वासिफ अजीज ने NEET परीक्षा में लहराया परचम, सेल्फ स्टडी से क्रैक किया नीट, ननिहाल में रहकर पाई सफलता
चंदौली के रेमा गांव के एक बुनकर परिवार के बेटे वासिफ अजीज ने कमाल कर दिया है। बिना किसी महंगे कोचिंग संस्थान के, केवल सेल्फ स्टडी के दम पर वासिफ ने NEET परीक्षा में 13325वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है।
रेमा गांव के बुनकर परिवार का बेटा बना मिसाल
बिना किसी कोचिंग के दूसरे प्रयास में NEET क्रैक
नीट परीक्षा में हासिल की 13325वीं ऑल इंडिया रैंक
बचपन से ननिहाल में रहकर सीमित साधनों में की पढ़ाई
डॉक्टर बनकर समाज के जरूरतमंदों की सेवा करने का सपना
चंदौली जिले के रेमा गांव से जुड़े एक साधारण बुनकर परिवार के बेटे वासिफ अजीज ने अपनी बेजोड़ मेहनत और लगन के दम पर समाज की उन तमाम रूढ़िवादी धारणाओं को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है, जिनके तहत अक्सर मुस्लिम समाज के युवाओं को लेकर संकुचित टिप्पणियां की जाती हैं। वासिफ अजीज ने अपने दूसरे ही प्रयास में देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET में 13325वीं ऑल इंडिया रैंक प्राप्त कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है। वासिफ, रेमा गांव के निवासी हाजी शमशाद के नाती हैं और बचपन से ही अपने ननिहाल में रहकर अपनी पढ़ाई-लिखाई करते रहे हैं।

बिना किसी महंगे कोचिंग के सेल्फ स्टडी से रचा इतिहास
आज के दौर में जहां लोग नीट जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करने के लिए लाखों रुपये खर्च करके बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं, वहीं वासिफ ने एक अलग मिसाल कायम की है। बेहद सीमित संसाधनों के बीच रहते हुए उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। वासिफ ने केवल स्व-अध्ययन (सेल्फ स्टडी), कड़े अनुशासन और लगातार की गई कड़ी मेहनत के बल पर यह शानदार सफलता हासिल की है। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि साबित करती है कि अगर लक्ष्य के प्रति पक्का समर्पण और मजबूत हौसला हो, तो बड़ी से बड़ी आर्थिक या सामाजिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।

डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करने का है सपना
अपनी इस शानदार सफलता का पूरा श्रेय वासिफ ने अपने माता-पिता, नाना-नानी और अपने पूरे परिवार को दिया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि परिवार के निरंतर सहयोग, भरोसे और आशीर्वाद ने ही उन्हें हर मुश्किल घड़ी में आगे बढ़ने की ताकत दी। वासिफ का सपना अब एक सफल डॉक्टर बनकर समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की मुफ्त व बेहतर सेवा करना है। वासिफ की इस बड़ी कामयाबी से उनके परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र के लोगों में खुशी और जश्न का माहौल है।
प्रतिभा किसी जाति, धर्म या पेशे की मोहताज नहीं
इस खुशी के मौके पर उनके नाना हाजी शमशाद ने वासिफ को मिठाई खिलाकर बधाई दी। उन्होंने गर्व से कहा कि वासिफ की यह सफलता जिले के तमाम उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो विपरीत हालातों में पढ़ाई कर रहे हैं। यह उपलब्धि समाज को एक बड़ा और साफ संदेश देती है कि प्रतिभा कभी भी किसी जाति, मजहब या पेशे की मोहताज नहीं होती है। मेहनत, सच्ची लगन और खुद पर मजबूत आत्मविश्वास ही इंसान को सफलता की असली मंजिल तक पहुंचाता है।
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