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₹65 करोड़ की होलसेल फिश मार्केट उद्घाटन के बाद भी काम नहीं हुआ शुरू, कब दूर होंगी ये गड़बड़ियां

चंदौली की ₹65 करोड़ की होलसेल फिश मार्केट में दुकानों का आवंटन उद्घाटन के एक महीने बाद भी नहीं हो सका है। सेंट्रल एसी और सोलर प्लांट जैसी सुविधाएँ अभी तक नहीं लगी हैं। मत्स्य विभाग के निदेशक ने किराये की गाइडलाइन न मिलने को आवंटन में देरी का कारण बताया।
 

चंदौली की ₹65 करोड़ लागत वाली होलसेल फिश मार्केट अधूरी

एक महीने बाद भी 111 दुकानों का आवंटन फंसा

एसी और सोलर प्लांट नहीं लगे

मंडी समिति की गाइडलाइन और संसाधनों के अभाव में फंसा आवंटन

चंदौली में दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर ₹65 करोड़ की लागत से निर्मित स्टेट ऑफ द आर्ट होलसेल फिश मार्केट का भवन बाहर से बेहद आकर्षक दिखता है, लेकिन हकीकत यह है कि उद्घाटन के लगभग एक महीने बाद भी यह परियोजना अधूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अक्टूबर को नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कॉम्प्लेक्स से इस मार्केट का वर्चुअली उद्घाटन किया था। इस मत्स्य मंडी से पूर्वांचल के मत्स्य पालकों की आय दोगुनी से अधिक होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके संचालन को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

111 दुकानों का आवंटन फंसा, एसी पर संशय

मार्केट की निष्क्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसमें बनी 111 दुकानों का आवंटन न हो पाना। एक महीने बीत जाने के बाद भी आवंटन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इसके साथ ही, जिन आधुनिक सुविधाओं का दावा किया गया था, वे भी नदारद हैं। अधिकारियों द्वारा सेंट्रल वातानुकूलित होने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक एसी नहीं लगाए जा सके हैं।

अब अधिकारियों का कहना है कि दुकानदार स्वयं एसी लगवाएगा, जिससे संशय की स्थिति बन गई है। इसके अलावा, ऊर्जा संरक्षण के लिए अपेक्षित 400 किलोवाट का सोलर पावर सिस्टम और वेस्ट मैनेजमेंट के विशेष प्रबंध भी अभी तक ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं।

गाइडलाइन और उच्च किराया आवंटन में बाधा

आवंटन में हो रही देरी के कारणों पर मत्स्य विभाग के निदेशक, रामलाल निषाद ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दुकान के आवंटन के लिए अभी तक गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही, मंडी समिति ने दुकानों का किराया अधिक लगा दिया था, जिसे लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक कर शासन को पत्र भेजा गया है।

उन्होंने स्वीकार किया कि एसी और अन्य संसाधनों की व्यवस्था अभी नहीं हो पाई है, क्योंकि छह करोड़ रुपये अभी भी बचे हैं। उन्होंने गाइडलाइन आने के बाद ही आवंटन प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। इस देरी से मत्स्य पालकों में निराशा है, जो जल्द से जल्द मंडी के संचालन की उम्मीद लगाए बैठे थे।

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