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कांग्रेस 4 बार तो इस पार्टी ने चंदौली में 1 बार किया था क्लीन स्वीप, BJP-SP-BSP भी नहीं कर सकी हैं ऐसा करिश्मा
चंदौली जिले में सर्वाधिक राजनेता और विधायक देने वाली कांग्रेस पार्टी आजकल जमीन पर उतरकर संघर्ष करने की कोशिश जरूर कर रही है
 

चंदौली में कांग्रेस 4 बार किया था क्लीन स्वीप

चंदौली में जनता पार्टी 1 बार किया था क्लीन स्वीप

BJP-SP-BSP भी नहीं कर सकी हैं ऐसा करिश्मा

चंदौली जिले में सर्वाधिक राजनेता और विधायक देने वाली कांग्रेस पार्टी आजकल जमीन पर उतरकर संघर्ष करने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में वह जोशोखरोस नहीं दिखाई दे रहा है, जो 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए होना चाहिए। फिलहाल प्रियंका गांधी के निर्देश पर कांग्रेस पार्टी के छोटे-बड़े कार्यकर्ता जमीन पर उतर चुके हैं और पदयात्रा और अन्य तरह के आयोजनों के जरिए अपना जोश दिखा रहे हैं।

 आपको बता दें कि चंदौली के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस पार्टी इकलौती ऐसी पार्टी है जिसने 2 दर्जन विधायक दिए हैं। कांग्रेस आजादी के बाद से 1985 तक चंदौली जिले में काफी सशक्त राजनीतिक पार्टी थी और पंडित कमलापति त्रिपाठी इसके नेता माने जाते थे। इसके साथ ही साथ पार्टी के अन्य सहयोगी और कार्यकर्ता उनके साथ मिलकर चंदौली जिले में कई राजनैतिक रिकॉर्ड बना चुके हैं। हम आपको कांग्रेस पार्टी के उन्हीं राजनीतिक रिकार्डों की जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

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 आपको बता दें कि चंदौली जिले में मौजूद चार विधानसभाओं में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर कुल 24 विधायक निर्वाचित होकर अब तक विधानसभा में जा चुके हैं। इनमें से सर्वाधिक 7 बार विधायक चकिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक कांग्रेसी नेता विधानसभा में गए हैं, जबकि मुगलसराय और सैयदराजा (पहले चंदौली) विधानसभा से छह-छह बार विधायक चुने गए हैं। वही सबसे कम 5 बार सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेसी विधायकों ने किया है। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी चंदौली जिले में चार बार जिले की चारों विधानसभा सीटों को जीतते हुए क्लीन स्वीप करने का काम किया है। फिलहाल यह कारनामा दोहराने में प्रदेश व देश में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी व सरकार बनाने का दावा कर रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पार्टियां अब तक असफल साबित हुई हैं।

आपको बता दें कि 1952 के चुनाव में चारों विधानसभा सीटें जीतने वाले विधायकों में पंडित कमलापति त्रिपाठी चंदौली से, रामलखन चकिया से,  कामता प्रसाद विद्यार्थी चंदौली उत्तरी और पंडित उमाशंकर तिवारी चंदौली रामनगर सीट से जीतकर कांग्रेस के पहले विधायक बने थे। वहीं 1957 के दूसरे विधानसभा चुनाव में चारों सीटों पर जीत हासिल करने वाले विधायकों में पंडित कमलापति त्रिपाठी, रामलखन, कामता प्रसाद विद्यार्थी और मुगलसराय से श्यामलाल यादव चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचने का काम किया था। इसके बाद सन 1980 में तीसरी बार ऐसा हुआ कि जब कांग्रेस पार्टी के चारों उम्मीदवार विधानसभा में चुनाव जीतकर गए हैं।

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1980 के चुनाव में चंदौली सीट से संकठा प्रसाद शास्त्री, मुगलसराय विधानसभा सीट से रामचंद्र शर्मा, चकिया विधानसभा सीट से खरपत राम और धानापुर विधानसभा सीट से रामजनम चुनाव जीतने में सफल रहे। 5 साल बाद जब 1985 में एक बार फिर विधानसभा के चुनाव हुए तो उसमें भी कांग्रेस पार्टी ने सारे दलों को पछाड़ते हुए चारों सीटों पर अपने उम्मीदवार जिताने में सफलता पाई। 1985 में चंदौली विधानसभा सीट से संकठा प्रसाद शास्त्री, मुगलसराय विधानसभा सीट से पंडित रामचंद्र शर्मा, चकिया विधानसभा सीट से खरपतराम और धानापुर विधानसभा सीट से रामजनम एक बार फिर से विधानसभा में पहुंचने में सफल रहे, लेकिन 1985 के बाद कांग्रेस पार्टी एक बार भी विधानसभा सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई और धीरे-धीरे चंदौली जिले में कांग्रेस पार्टी का जनाधार गिरता रहा। 

जनता पार्टी के नाम है यह उपलब्धि

यह कारनामा चंदौली जिले में कांग्रेस पार्टी के अलावा 1977 में जनता पार्टी ने किया था, जब यहां पर मुगलसराय सीट से गंजी प्रसाद, चकिया विधानसभा सीट से श्यामदेव, धानापुर सीट से कैलाशनाथ सिंह यादव और चंदौली विधानसभी से पंडिट रामप्यारे तिवारी चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इस तरह से यह रिकॉर्ड बनाने का काम जनता पार्टी के विधायकों ने किया और 1977 में चंदौली जिले के चारों विधायक विधानसभा में पहुंचे। इस बार कांग्रेसी उम्मीदवारों को बुरी तरह से हार हुई थी।

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तीन-तीन विधायकों को जिताने में मिली है सफलता

 इसके अलावा संघटा सोशलिस्ट पार्टी के 1967 में तीन विधायक जीते थे। 1967 के विधानसभा चुनाव में चकिया विधानसभा से बेचन राम, धानापुर से बैजनाथ और चंदौली सीट से कमलापति त्रिपाठी को मात्र 397 वोटों से हराते हुए चंद्रशेखर सिंह विधायक बने थे। तब इस लहर में भी मुगलसराय सीट पर कांग्रेस के टिकट पर श्यामलाल यादव चुनाव जीतने में सफल रहे थे।

एक पार्टी के टिकट पर 1989 में भी तीन विधायक विधानसभा में गए थे। जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतने वालों में चंदौली (अब सैयदराजा) से छन्नू लाल शास्त्री, चकिया से सत्य प्रकाश सोनकर और धानापुर से दयाशंकर सिंह शामिल थे। तीन विधायक जनता दल के टिकट पर विधानसभा में पहुंचे थे तो 1989 में उस समय मुगलसराय विधानसभा सीट से गंजी प्रसाद निर्दल उम्मीदवार के चुनाव के रूप में चुनाव लड़े और जीत हासिल करते हुए जनता दल के उम्मीदवार को क्लीन स्वीप करने से रोक दिया था। 

कुछ यही हाल 2017 के विधानसभा चुनाव में हुआ जिसमें मोदी लहर के बावजूद भाजपा केवल 3 सीटें जीत सकी। सैयदराजा से सुशील सिंह, मुगलसराय से साधना सिंह व चकिया से शारदा प्रसाद भाजपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा में चले गए, लेकिन सकलडीहा विधानसभा सीट पर भाजपा का खेल सपा के प्रभुनारायण यादव ने बिगाड़ दिया।

कांग्रेस के गिरते जनाधार के बारे में कहा जाता है कि चंदौली में कांग्रेस पार्टी के अंदर पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद कोई ऐसा नेता नहीं उभर सका, जो चंदौली जिले में कांग्रेस पार्टी के परचम को लहराते हुए कांग्रेसी नेताओं में जोश भर सके और पार्टी के अंदर छोटीमोटी गुटबाजी को खत्म कर सके। कुछ लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी अपने अंदरूनी कलह और कार्यकर्ताओं को तवज्जो न देने की वजह से खत्म होती गई। इतने दिन तक सत्ता में रहने वाली पार्टी अचानक से अपना जनाधार खो दें और शिखर से शून्य तक पहुंच जाए तो इसके पीछे कोई बड़ा कारण ही रहा होगा।


बोल रहे कांग्रेस के दावेदार 


 इस बारे में कांग्रेस पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे डॉक्टर नारायण मूर्ति ओझा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी थी, लेकिन 1985 के बाद प्रदेश में जातिवाद का बोलबाला बढ़ा और क्षेत्रीय दल बनने लगे। उसके बाद राम मंदिर आंदोलन आया और उसकी वजह से धर्म और जाति की राजनीति शुरू हो गई। धर्म और जाति के गठजोड़ में विकास पीछे हो गया और कांग्रेस कमजोर पड़ती गई, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कांग्रेस एक बार फिर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। 


गुटबाजी व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा ले डूबी


कांग्रेस में अपना तीन दशक का कार्यकाल पूरा करने वाले और पत्रकारिता के जरिए जिले में पहचान बनाने वाले श्रीधर द्विवेदी का कहना है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व न देने की वजह से कांग्रेस पार्टी धीरे-धीरे कमजोर होती गई। कांग्रेस के कुछ बड़े और स्वयंभू नेता गुटबाजी को बढ़ावा देते रहे। चंदौली जिले में पंडित कमलापति त्रिपाठी, श्यामलाल यादव और रत्नाकर पांडेय जैसे नेताओं के गुट बन गए थे। श्यामलाल यादव और रत्नाकर पांडे के परिवार से कोई अन्य नेता आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन पंडित कमलापति त्रिपाठी के परिवार के लोग आगे बढ़ते रहें। उनकी चौथी पीढ़ी राजनीति में आ गयी।

कमलापति त्रिपाठी भले ही चंदौली के लिए विकास पुरुष रहे हैं, लेकिन उनके ऊपर भी यह आरोप लगते रहे कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अंदर अपनी विरासत को आगे बढ़ाने वाला नेता पैदा ही नहीं होने दिया। उनके परिवार के लोग भी चंदौली जिले के अंदर उस तरह से लगाव नहीं रख पाए, जैसा पंडित कमलापति त्रिपाठी का था। इसलिए कांग्रेस आज कमजोर हो गयी है।


दिखेगा हर जगह फर्क


 वहीं इस मामले पर प्रदेश कांग्रेस के सचिव जैनेंद्र पांडेय ने कहा कि किसी भी दल को वोट कम या अधिक मिल सकता है, लेकिन कोई पार्टी खत्म नहीं होती है। कांग्रेस विचारधारा की पार्टी है और कभी खत्म नहीं होगी। पिछले 3 साल से उत्तर प्रदेश में जिस तरह से प्रियंका गांधी ने अपने नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को संजीवनी देने का काम किया है, वह काबिले तारीफ है। आने वाले दिनों में आपको कांग्रेस पार्टी का बढ़ता हुआ जनाधार दिखाई देगा और एक बार फिर चंदौली जिले में कांग्रेस का खोया हुआ गौरव वापस आएगा। इसके लिए पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बूथ लेवल से लेकर जिला स्तर तक लगे हुए हैं। आपको आने वाले दिनों में एक बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा।