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इन 10 कारणों से परेशान हैं चंदौली के किसान, नेता-अफसर-किसान तीनों नहीं चाहते पूर्ण समाधान
चंदौली जिला धान का कटोरा कहा जाता है और धान को लेकर चंदौली जिले की राजनीतिक मंच के साथ-साथ अफसरों की बैठक में खूब चर्चाएं होती हैं
 

चंदौली जिले में धान खरीद में हेराफेरी

समस्याओं पर चंदौली समाचार की सीरीज का यह है पहला भाग

दूसरे व तीसरे भाग में होंगे बड़े खुलासे

चंदौली जिला धान का कटोरा कहा जाता है और धान को लेकर चंदौली जिले की राजनीतिक मंच के साथ-साथ अफसरों की बैठक में खूब चर्चाएं होती हैं, लेकिन धान की समस्याओं को जड़ से खत्म करने की चंदौली जिले के अफसरों और राजनेताओं के द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जाती है। ऐसी बात इसलिए कहने पड़ रही है क्योंकि चंदौली जनपद कि किसानों की मूलभूत समस्याएं जस की तस हैं। हंगामा मचने पर मौके पर पहुंचकर अफसर और राजनेता झूठे और दिखावे वाले आश्वासन तो दे देते हैं, लेकिन उसका फर्क पड़ता कहीं भी नजर नहीं आता है।

कुछ ऐसा ही आजकल चंदौली जिले में चल रही धान खरीद की व्यवस्था में हो रहा है चंदौली समाचार के एडिटर विजय कुमार तिवारी ने इन समस्याओं को जानने परखने और समझने की कोशिश की, जिसके चलते चंदौली जनपद में धान खरीद की 10 बड़ी समस्याएं नजर आयीं। अगर अधिकारी और राजनेता इन समस्याओं के समाधान पर पहल करेंगे तो चंदौली जनपद वास्तव में धान का कटोरा बनेगा और किसान शोषण का शिकार होने से बच जाएंगे। 

1. बिचौलियों का बोलबाला 

चंदौली जनपद में हर किसान और राजनेता यह बात कहता है कि चंदौली जनपद में बिचौलिए और राइस मिलर्स की सांठगांठ के चलते किसानों के धान की खरीद नहीं हो पाती है। यह गठजोड़ काफी पुराना और मजबूत है, जो सीधे अधिकारियों और क्रय केंद्र प्रभारियों से भी मिला हुआ है। बिचौलिए क्रय केंद्र प्रभारियों और अधिकारियों से मिलकर सस्ते दर पर किसानों का धान खरीद लेते हैं और उसको क्रय केंद्र पर या तो उनके ही कागजात पर बेचते हैं या अपनी सेटिंग गेटिंग से किसी और के कागजात पर धान को क्रय केंद्रों पर खपा देते हैं। यह सच्चाई संभवत जिले के कई किसान बयान तो करते हैं, लेकिन खुलकर सिर्फ इसलिए नहीं बोलते क्योंकि उनको धान क्रय केंद्रों पर जाकर अपना धान बेचना होता है। अगर वह इस तरह का विरोध खुलकर करेंगे तो उनको अपना धान बेचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और वह अधिकारियों और राजनेताओं के निशाने पर आ सकते हैं।

चंदौली जिले की ताजा स्थिति यह है कि राइस मिलर्स के एजेंट व बिचौलिए 1650 से लेकर 1750 के बीच का रेट तय करके किसानों का धान ले रहे हैं और क्रय केन्द्रों पर खपा रहे हैं, जिसकी पुष्टि व जांच कभी भी गांव में जाकर परेशान होने वाले किसानों से की जा सकती है।

 अगर चंदौली जनपद के राजनेता और किसान वास्तव में इस समस्या का समाधान चाहते हैं, तो उन्हें एकजुट होकर अधिकारियों के सामने बैठकर इस समस्या का समाधान कराना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि बिचौलिए किसी भी कीमत में कम पैसे देकर धान न खरीद पाएं या बिचौलियों का धान किसी भी कीमत पर क्रय केंद्र पर न बिक सके। अगर ऐसा हो गया तो बिचौलिए इस तरह का काम करना बंद कर देंगे और किसानों का शोषण होना भी बंद कर दिया जाएगा।

 चंदौली जिले में यह बात जगजाहिर है कि बिचौलिए और राइस मिलर्स के प्रतिनिधि गांव में जाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर धान खरीद लेते हैं और फिर उसे अपनी सेटिंग गेटिंग से क्रय केंद्रों पर बेचने का काम करते हैं और इसके बीच की धनराशि आपस में बांटने का काम करते हैं। किसान ऐसा सिर्फ मजबूरी में करने को तैयार होता है क्योंकि वह जब अपना धान लेकर क्रय केंद्र पर जाता है तो क्रय केंद्र प्रभारी और वहां मौजूद अक्सर उन्हें तमाम तरह की कमियां निकाल कर परेशान करने की कोशिश करते हैं, जबकि वही धान बिचौलियों के माध्यम से नंबर 1 बनकर बिक जाता है। कमीशन और सेटिंग की वजह से बिचौलियों के धान में किसी भी क्रय केंद्र प्रभारी या अधिकारी को कोई कमी नजर नहीं आती है।

2. क्रय केन्द्र प्रभारी बेलगाम

 चंदौली जनपद के जितने भी एजेंसियों पर धान की खरीद हो रही है, उन पर काम करने वाले क्रय केंद्र प्रभारी या एजेंसी को चलाने वाले लोग बेलगाम हैं और अपने आप को दबंग साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। अगर कोई किसान या कमजोर व्यक्ति उनके क्रय केंद्र पर किसी भी समस्या या शिकायत को ऊपर ले जाने की कोशिश करता है तो उनके धान को या तो रिजेक्ट कर दिया जाता है या तो उन्हें अनाप-शनाप तरीके से परेशान किया जाता है। कुछ क्रय केंद्र प्रभारी और उसके चलाने वाले लोग तो किसानों को बाकायदा फोन कर कर धमकी भी देते हैं और यह भी कहते हैं कि उनकी शिकायत से उनका कुछ नहीं उखड़ने वाला है, क्योंकि सारे लोग जानते हैं। सारे लोग उसमें शामिल हैं। 

अब यह बात सच है या गलत...यह तो अफसर और क्रय केन्द्र चलाने वाले लोग ही जानें.. लेकिन अगर सच है तब तो जनता को चीखने चिल्लाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। शायद इसीलिए किसान बिचौलियों को अपना धान बेच देते हैं। अगर ययह शिकायत गलत है तो अफसर और सत्ता पक्ष के राजनेता लोगों को खुलकर सामने आना चाहिए और ऐसे लोगों को जेल भेजने की कोशिश करनी चाहिए जो सरकार व अफसरों को जानबूझकर बदनाम कर रहे हैं।

सच्चाई का पता लगाकर ईमानदारी से पहल होगी तो इससे क्रय क्रेन्द्र चलाकर चंद सालों में लखपति व करोड़पति बन गए लोगों की पोल खुलेगी और सरकार को बदनाम करने वाले लोग भी एक्सपोज हो जाएंगे। केवल जेल भेजने की धमकी देने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि यह बंदरधुड़की है...इमानदार संदेश नहीं।

विधायक जी के मौके से जाते ही एक किसान ने कहा कि दो-चार लोगों को जेल भेजकर एक बड़ा संदेश दिलवाना चाहिए कि वह (विधायकजी) किसान के हितैषी हैं न कि क्रय केंद्र चलाने वाले इन माफिया किस्म के लोगों के। अगर ऐसा हुआ तो वह कोई खेल नहीं करेंगे।  हमें तो लगता है ये नेताजी लोग केवल क्रय केंद्रों पर जाकर दिखावा करते हैं। इनको सारी समस्या की जड़ मालूम है, लेकिन वह दूर करने में असहाय और फेल साबित हो रहे हैं। 

3. क्रय केन्द्रों पर अतिरिक्त धान की वसूली


धान क्रय केंद्रों पर होने वाले अतिरिक्त धन की वसूली जिले के हर धान खरीद केंद्र पर मानक पूरा न करने का आरोप लगाकर की जा रही है। वसूली का धान देते ही रिजेक्टेड धान एक नंबर का हो जाता है। चंदौली जिले में इस वसूली का रेट प्रति कुंटल 5 किलो से लेकर 8 किलोग्राम तक है। ऐसे में किसान न चाहते हुए भी क्रय केंद्र प्रभारियों की बात मानने को मजबूर है, क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो उसका धान किसी भी कीमत पर बिक नहीं सकता।

 धान खरीद केंद्र को चलाने वाले लोग अपने क्रय केंद्र प्रभारियों से साफ-साफ कह चुके हैं कि अगर कोई किसान प्रति क्विंटल की दर से अतिरिक्त ध्यान नहीं देता है, तो उसकी खरीद न की जाए। इस अतिरिक्त धान की वसूली सिर्फ इसलिए होती है कि उसमें समस्त विभागों का हिस्सा है। अगर किसान अपनी शिकायत लेकर किसी अधिकारी के पास भी जाएगा तो वह केवल फोन कर कर आदेश और दिशा निर्देश देगा, लेकिन उसके धान की खरीद तब तक नहीं होगी, जब तक वह क्रय केंद्र के प्रभारी की बात ना मान ले।

4. ऑफलाइन टोकन में मनमाने तरीके से खरीद

ऑफलाइन टोकन का खेल जानने के बाद ही उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑफलाइन टोकन की प्रक्रिया को खत्म करके ऑनलाइन टोकन की प्रक्रिया शुरू की थी, ताकि बिचौलियों के माध्यम से धान की खरीद न हो सके और ऑनलाइन टोकन के माध्यम से क्रय केंद्र पर नकेल कसी जाए। लेकिन क्रय केंद्र चलाने वाले एजेंसियों और अफसरों ने इस पूरी प्रक्रिया को फेल साबित करने के लिए अपनी ओर से भरपूर कोशिश की और इस तरह की कार्य शैली अपनाई कि किसान परेशान हो जाएं और सरकार के ऊपर भी दबाव बने कि ऑनलाइन प्रक्रिया रद्द हो जाए। सरकार की मजबूरी का फायदा उठाकर चुनावी सीजन में सरकार को यही करना पड़ा। ऑफलाइन और ऑनलाइन के चक्कर में बार-बार नियम और कानून बदलते रहे। अधिकारी शासन के निर्देश का बहाना बनाते रहे और राजनेता बार-बार मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों से बात करने की बात कहते रहे, लेकिन नतीजा वही हुआ।

 अंत में सरकार को हार कर ऑफलाइन टोकन से धान खरीद की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी और किसानों के एक टोकन पर अधिकतम धान बिक्री की सीमा को भी खत्म करना पड़ा। इसके चलते क्रय केंद्र प्रभारी अब खुलेआम अपनी मनमानी कर रहे हैं और जिसका धान चाहते हैं उसकी खरीद हो जाती है और इसका धान नहीं खरीदना चाहते हैं उसे परेशान करके तमाम तरह की कमियां निकाल दी जा रही है। 

 यह बात किसान, राजनेता और अफसर तीनों को पता है लेकिन किसान डर के मारे कोई लिखा पढ़ी वाली शिकायत सिर्फ इसलिए नहीं कहता कि ऐसा करने पर वह अपना धान घर में ही रखना पड़ेगा या बिचौलियों को बेचना पड़ेगा। किसी भी क्रय केंद्र पर उसका धान कभी नहीं बिक पाएगा।

5. नमी व अन्य कारणों से रिजेक्ट करने की धमकी

धान की नमी और अन्य कारणों से रिजेक्शन करके किसानों को परेशान किया जाता है। धान खरीद केंद्रों पर धान ना खरीदने का सबसे बड़ा हथियार धान की नमी और उसमें गंदगी या अन्य चीजों का होना बताया जाता है। लेकिन किसान भी अपनी क्षमता और संसाधन के अनुरूप इन सब चीजों को दूर करने की कोशिश करने के बाद ही क्रय केंद्र पर अपना धान लेकर जाता है। फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार ने नमी की मात्रा 17 प्रतिशत सुनिश्चित की है, लेकिन जब लगातार मौसम खराब हो और मौसम में नमी हो तो धान में नमी की मात्रा बरकरार रखना काफी कठिन होता है। इतना ही नहीं अगर धान खरीद केंद्र पर गिरा दिया जाए और एक-दो दिन तक से खुले मौसम में रख दिया जाए तो धान में नमी की मात्रा घटने के बजाय बढ़ जाती है। इसकी वजह से जिस किसान का धान नहीं खरीदना होता है उसकी नमी दिखाकर रिजेक्ट कर देते हैं। कुछ जगहों पर गंदगी या अन्य कारण भी बताए जाते हैं। इसका भी कोई ठोस उपाय निकालना चाहिए, ताकि को रिजेक्शन इमानदारी से हो केन्द्र प्रभारियों की मनमानी से नहीं।

   इंतजार करिए...... कल सबेरे अगली खबर में बाकी के 5 कारण और विशेष जानकारी और खास तरह का खुलासा