'जब संसद-विधानसभा में एंट्री तो दिशा बैठक में क्यों पाबंदी?' मीडिया को बाहर करने पर पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने दागा सवाल
चंदौली 'दिशा' बैठक से मीडिया को बाहर रखने पर सियासत गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने मौजूदा सपा सांसद पर निशाना साधते हुए इसे लोकतंत्र और पारदर्शिता के खिलाफ बताया है।
मीडिया को बाहर रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
पारदर्शिता के लिए मीडिया बेहद जरूरी
पहले सपा सरकार में भी रोका
संसद में एंट्री तो यहाँ क्यों रोक?
सपा सांसद ने दी सफाई
चंदौली जिले में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी 'दिशा' की बैठक को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार विवाद विकास कार्यों को लेकर नहीं, बल्कि बैठक से मीडिया को बाहर का रास्ता दिखाने पर शुरू हुआ है। इस पूरे मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद वीरेंद्र सिंह पर बिना नाम लिए सीधा निशाना साधा और इस कदम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र को जिंदा रखने और उसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मीडिया की मौजूदगी सबसे ज्यादा जरूरी है।

बंद कमरे में नेताओं और अफसरों का गठजोड़
बैठक के दौरान कलेक्ट्रेट का नजारा देखकर ऐसा लगा मानो सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अधिकारियों के साथ बंद कमरे में कोई गुप्त गठजोड़ कर लिया हो। जनता के सामने एक-दूसरे के धुर विरोधी दिखने वाले नेता अंदर अफसरों के साथ सुर में सुर मिलाते नजर आए। बाहर दिखाने के लिए भले ही गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए, लेकिन मीडिया को दूर रखकर अंदर की हकीकत को छिपाने की कोशिश की गई। डॉ. पांडेय ने इसी मानसिकता पर चोट की है।

डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने याद दिलाया पुराना दौर
पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि साल 2014 से पहले भी दिशा की बैठकों से मीडिया को दूर रखने की एक गलत परंपरा बनी हुई थी। लेकिन जब वे साल 2014 में सांसद बनकर आए, तो उन्होंने जनता के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने 2014 से लेकर 2024 तक हर बड़ी बैठक में मीडिया को ससम्मान शामिल किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से 2017 के बीच जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब भी मीडिया को रोकने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन उन्होंने हमेशा मीडिया के सामने बेबाकी से हर योजना का सच रखा।
सपा सांसद की सफाई और लोकतंत्र की दुहाई
जब इस पाबंदी को लेकर सपा सांसद वीरेंद्र सिंह से पहले बात की गई थी, तो उन्होंने अजीब तर्क दिया था। उनका कहना था कि कुछ लोग बैठक में केवल 'छपास' (अखबारों में छपने) की इच्छा से आते हैं और अंदर की बातें बाहर न जाएं, इसलिए मीडिया को सिर्फ शुरू में फोटो और वीडियो लेने की इजाजत दी जाएगी और बाद में प्रेस नोट दे दिया जाएगा। इस पर पलटवार करते हुए डॉ. पांडेय ने कहा कि अगर देश की संसद और राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही को मीडिया लाइव कवर कर सकती है, तो जिले की एक विकास बैठक में पत्रकारों की मौजूदगी से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन बताते हुए जनप्रतिनिधियों को मीडिया के प्रति अपनी सोच बदलने की नसीहत दी।
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