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कुछ खास उद्देश्य से DD साहब के ऑफिस आए थे JD साहब, अंदरखाने में कई तरह की चर्चाएं

धान की फसल की गुणवत्ता बहुत अच्छी पाई गई। निरीक्षण के बाद, उन्होंने उपस्थित किसानों से अपील की कि वे लागत कम करने के लिए धान की बुवाई इसी विधि से करें।
 

चंदौली में संयुक्त कृषि निदेशक ने किया निरीक्षण

किसानों ने उठाई सब्सिडी, सिंचाई और जैविक खेती की मांग

नमामि गंगे योजना के तहत चल रहे जैविक खेती कलस्टर को भी देखा  

चंदौली जिले में आए संयुक्त कृषि निदेशक, वाराणसी मण्डल, वाराणसी शैलेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को चंदौली में उप कृषि निदेशक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जनपद में चल रही योजनाओं का जायजा लेने के लिए कई गांवों का स्थलीय निरीक्षण भी किया और किसानों से सीधे बातचीत की।

निरीक्षण के दौरान, संयुक्त कृषि निदेशक गुरेहूं गांव, विकास खंड धानापुर पहुंचे, जहाँ उन्होंने किसान आलोक पाण्डेय द्वारा धान की डी.एस.आर. (सीधी बुवाई) विधि से की गई खेती को देखा। धान की फसल की गुणवत्ता बहुत अच्छी पाई गई। निरीक्षण के बाद, उन्होंने उपस्थित किसानों से अपील की कि वे लागत कम करने के लिए धान की बुवाई इसी विधि से करें।

Agriculture inspected

किसानों ने इस दौरान अपनी कुछ महत्वपूर्ण मांगे भी रखीं। उन्होंने डी.एस.आर. मशीन पर 80% तक की सब्सिडी देने, इस विधि के लिए उपयुक्त खरपतवारनाशी रसायन 'काउंसेल' पर भी सब्सिडी देने और एक मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की मांग की। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनके सुझाव उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिए जाएंगे।

मक्का विकास और सिंचाई की समस्याएँ
इसी क्रम में, अधिकारी लक्ष्मण मौर्या के गांव धानापुर पहुंचे, जहाँ उन्होंने त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत मक्के के प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया। मक्के की फसल की गुणवत्ता भी संतोषजनक पाई गई। किसानों ने बातचीत के दौरान जिप्सम की मांग की और सुझाव दिया कि हरी खाद के रूप में ढैंचा के साथ-साथ मूंग का बीज भी समय से उपलब्ध कराया जाए।

Agriculture inspected

इस दौरान किसानों ने सिंचाई से संबंधित एक गंभीर समस्या भी उठाई। कृषक कमल नाथ मिश्रा और शैलेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि नगवा पम्प कैनाल और भुपौली पम्प कैनाल गंगा नदी में बाढ़ आने पर अक्सर बंद कर दिए जाते हैं, जिससे धान की फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है। उन्होंने इन पम्प कैनालों को सुचारू रूप से संचालित करने और गर्मियों में नहरों की अनिवार्य रूप से साफ-सफाई कराने की मांग की। अधिकारियों ने बताया कि जिप्सम की मांग लखनऊ भेजी जा चुकी है और सिंचाई के मुद्दे को संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा।

Agriculture inspected

जैविक खेती और मार्केटिंग पर जोर
संयुक्त कृषि निदेशक ने नमामि गंगे योजना के तहत चल रहे जैविक खेती कलस्टर का भी निरीक्षण किया। ग्राम बेवदा में किसान और कलस्टर प्रभारी रामधनी ने बताया कि वह दो बीघा में और किसान अरविंद पाण्डेय 10 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं।

निरीक्षण के बाद, विभाग ने नामित एजेंसी 'प्रकृति आर्गेनिक फार्म फ्रेश प्रा. लि.' के कार्मिकों को कई निर्देश दिए। उन्हें कहा गया कि वे कलस्टर में शामिल किसानों को जैविक खेती से संबंधित सभी इनपुट समय पर उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही, उनके द्वारा उत्पादित फसलों के बीज के प्रमाणीकरण और एफ.पी.ओ. (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से मार्केटिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को उनके जैविक उत्पादों का सही मूल्य मिल सके और अन्य किसानों एवं उपभोक्ताओं को भी जैविक बीज उपलब्ध हो सकें।

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