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जानिए क्यों नहीं बिक रहा है चंदौली जिले का असली काला चावल, बाजार में आ गए हैं डुप्लीकेट चावल
चंदौली जिले में उत्पादित काला चावल इस समय किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है, क्योंकि काला चावल के नाम पर डुप्लीकेट करने वाले कंपनी व किसानों के कारण जिले का काला चावल नहीं बिक रहा है।
 

नहीं बिक रहा है चंदौली जिले का असली काला चावल

बाजार में गए हैं डुप्लीकेट चावल

चंदौली जिले में उत्पादित काला चावल इस समय किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है, क्योंकि काला चावल के नाम पर डुप्लीकेट करने वाले कंपनी व किसानों के कारण जिले का काला चावल नहीं बिक रहा है। यह खुलासा तब हुआ जब प्रयागराज और सोनभद्र के काला चावल का नमूना मंगाया गया है।


बताते चलें कि चंदौली जिले में उत्पादित होने वाले काले चावल की डुप्लीकेसी करके किसानों को बेवकूफ बनाकर काला चावल के नाम पर दूसरे चावल के उत्पादन कराने के बाद उसे मार्केट में कम दामों में बेचने का काम किया जा रहा है । चंदौली जनपद में गुणवत्तापूर्ण  बिना रासायनिक खाद के उत्पादित काला चावल का उचित मूल्य न मिलने के कारण वह काला चावल के किसानों के लिए आफत बना हुआ है क्योंकि किसानों का धान आज भी मंडी समिति में रखकर बिकने का इंतजार किया जा रहा है ।


 

इस संबंध में काला चावल उत्पादन समिति के सचिव वीरेन्द्र सिंह द्वारा बताया गया कि कुछ जिलों के किसानों के द्वारा दूसरे वैरायटी के चावल को उत्पादित करके मार्केट में कम रेट में बेचने के कारण काला चावल के बिक्री पर ग्रहण लगा हुआ है । 


वहीं उन्होंने यह भी बताया कि इन दोनों चावलों में काफी अंतर है.. इसकी भी खूबी देखने पर अंतर साफ दिखने लगेगा.... ब्लैक राइस का उत्पादन गुणवत्तापूर्ण से होने के कारण चंदौली जनपद का ब्लैक राइस आज भी भारत वर्ष तथा अन्य देशों के लिए इकलौता एक प्रोडक्ट बनकर उभरा है, लेकिन कुछ कंपनियों द्वारा किसानों को झांसा देकर गलत वैरायटी के काला चावल का बीज किसानों को देकर उत्पादन कराने के बाद उस धान को काला चावल के नाम पर बेचने के कारण चंदौली जनपद के किसानों को आफत बन आई है ।


वही आपको यह भी बता दें कि यह ध्यान जब सोनभद्र तथा प्रयागराज के किसानों द्वारा उत्पादित नकली काला चावल बाजार में बेचने का काम किया जा रहा है, तो उसका असर रेट पर पड़ रहा है। वह कम दाम में ही बेच दिया जा रहा है । जिससे चंदौली जिले के गुणवत्तापूर्ण काला चावल की बिक्री पर ग्रहण लगा हुआ है । वहीं अन्य कंपनियों द्वारा यह कहा जा रहा है कि और जगहों पर काला चावल कम ही रेट में मिल रहा है तो आपका चावल अधिक रेट पर क्यों लिया जाए । जिसके लिए अब समिति को एकत्रित किए गए काला चावल के धान को खपत करने के लिए प्रदेश सरकार तथा अन्य कंपनियों से बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है, क्योंकि यह चावल अपने आप में एक गुणवत्तापूर्ण है और जो दूसरे वैरायटी का चावल है।

उधर सोनभद्र व प्रयागराज के चावलों में अंतर भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि पहले तो उसके धान की वैरायटी की काला चावल की वैरायटी से अलग है और उसमें से निकलने वाला चावल भी केवल ब्लैक होने के कारण उस कैटेगरी में आने का काम कर रहा है, लेकिन उसकी गुणवत्ता में आज भी अंतर देखने को मिल रहा है ।

black rice.


जब काला चावल समिति द्वारा गहन जांच की गई तो यह डुप्लीकेट चावल की उनके लिए बाधक दिखाई दे रहा है। जिस पर काला चावल समिति के सचिव वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि ऐसी डुप्लीकेसी करने वाले कंपनियों पर सरकार अंकुश नहीं लगाती है तो आने वाले दिनों में काला चावल के उत्पादन पर भी ग्रहण लग सकता है।