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खतरे की घंटी : जान लीजिए श्रीमान्.. आपके बारे में ऐसा सोच रहे हैं चंदौली के किसान
चंदौली जिले के किसान भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार ही नहीं बल्कि चंदौली जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के रवैये से भी काफी नाराज हैं।
 

इस खबर को पढ़कर जान पाएंगे चंदौली के किसानों का गुस्सा

जानिए दर्द बनिए हमदर्द..करिए मदद..नहीं तो आप जान ही रहे हैं

 

चंदौली जिले के किसान भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार ही नहीं बल्कि चंदौली जिले के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के रवैये से भी काफी नाराज हैं। चंदौली जिले के किसान धान खरीद की समस्या को लेकर जिस तरह से परेशान हैं, उसको लेकर उनके मन में जबरदस्त पीड़ा है और माना जा रहा है कि इसका प्रभाव आने वाले विधानसभा चुनाव 2022 पर भी पड़ने वाला है। इसके लिए हर जगह लोग तरह तरह की बातें करते हुए आपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। चंदौली समाचार की टीम ने किसानों के साथ उनके दर्द को साझा करने की कोशिश की..जानिए क्या कहते दिखे चंदौली के किसान....

का एही बदे भाजपा के चुनले रहली

मंडी समिति में धान बेचने के लिए परेशान 65 वर्षीय बुजुर्ग किसान ने कहा कि ..हे पत्रकार भईया हमरो सुना... बड़ी उम्मीद से मोदी पर भरोसा कईके भाजपा के वोट देहले रहली..कि सांसद विधायक दूनौ भाजपा का रहिहैं त झट से काम हो जाई और हमरे जइसन खांटी भाजपाइन क कल्याण होय जायी..लेकिन देख ला मदद करै के त दूर..कउनो बात सुनै भी ना आवत हउवैं..अबकी बार जब वोट मांगै अइहैं..तब बताइब। 10 दिन से धान बेचै बदे बुढ़ापा में दउड़ावत हउवैं इ लोग..ठीक न करत हउवैं। अब जनता भी इनके वो ही तरै सबक सिखायी जैसे बाकी सबके सिखउले रहल।  इतना बोल कर वह अपने धान की ओर चले गए। उनकी बात सुनते दूसरे किसान भी उनकी बात से सहमत दिखे। 

धान बिकै चाहे भाड़ में जाए..


पुलिस व एसडीएम के द्वारा जबरन पुलिस के दम पर चक्का जाम हटाने से नाराज युवा  किसान ने कहा कि... धान बिकै चाहे भाड़ में जाए..अबकी बार चारो विधायकन के निपटावै के हौ। इस सब कउनौ काम का ना हउवैं। केवल अपने अपने सेटिंग में लगल हउवैं। अगर किसानन क मददगार होतैं त आज किसानन के साथ खड़ा देखातैं। सब अपने टिकट लेवै और बचावै बदे परेशान हउवैं। उनके जनता और किसानन से का मतलब बाय। 

नंदलाल यादव भी परेशान हैं

चंदौली जिले की मंडी समिति में 20 दिसंबर से केवल 60 कुंटल धान गिराकर बेचने के लिए परेशान बिसौरी गांव के नंदलाल यादव की एफसीआई के केन्द्र पर आधी तौल करने के बाद खरीद रोक दी गयी और खरीद केन्द्र के लोग दूसरे लोगों का धान खरीदने तो लगे लेकिन इस बूढ़े गरीब किसान की बात कोई सुनता ही नहीं है। नंदलाल ने चंदौली समाचार से कहा कि... अधिकारी कहत हउवैं की 60 कुंटल तक धान खरीद की लिमिट एही बदै करल गइल हौ कि छोट-छोट किसानन का धान खरीदाय जायी..अगर अइसन सही में हौ त हमार काहे न खरीदल जात हौ। सब नाटक हौ साहब किसानन के परेशान करै बदे। सेटिंग-गेटिंग वालन क खरीदाय जात हौ..के हमहन के पूछत हौ। हमरे बदे केवल आजकल-आजल करत हउवैं..कब खरीद लिहैं..एकर कउनौ गारंटी ना बाय।

जब विधायक बनने का रास्ता जाम होगा तो क्या करेंगे

 चक्का जाम में पुलिस प्रशासन ने मौके पर मौजूद किसानों को हटाने के लिए जोर जबरदस्ती और उनके ऊपर मुकदमा दर्ज करने की भी धमकी दी। इस पर एक नाराज किसान ने कहा कि प्रशासन में इस बात का तो दम है नहीं कि वह जमाखोरों और दलालों के ऊपर मुकदमा दर्ज करें। जायज बात कहने के लिए अगर अधिकारी और कर्मचारी कार्यालयों में मौजूद होते और उनकी शिकायतों पर तत्काल फैसला करते तो आज सड़क पर आने की नौबत नहीं आती। मुकदमा दर्ज करने की धमकी देकर सड़क से जाम भले हटा लें, लेकिन जनता उनके खासमखास विधायकों को विधानसभा जाने के रास्ते को जाम कर देगी। तब क्या करेंगे। जैसे नेता हैं वैसे ही लिपिर चिपिर करने वाले लापरवाह अधिकारी।

क्यों आती है चक्का जाम की नौबत

आपको बता दें कि चंदौली जिले की मंडी समिति में धान बेचने के लिए परेशान किसानों ने पिछले 1 सप्ताह के अंदर कई बार अपनी समस्या आला अधिकारियों को बताई है और दो बार सड़क पर उतरकर चक्का जाम भी किया है। वहां पहुंचने वाले अधिकारी और पुलिस प्रशासन के लोग उनको झूठा आश्वासन देकर उनका चक्का जाम खत्म तो करा देते हैं, लेकिन इन अधिकारियों को यह समझ में नहीं आता कि वह ऐसा करके सरकार के प्रति किसानों में और अधिक नाराजगी बढ़ा रहे हैं या कम कर रहे हैं। वहां पहुंचने वाला अधिकारी जाम खत्म कराने के लिए झूठा आश्वासन दे देता है, ताकि तत्काल समय में मामला सलट जाय..उसके बाद क्या होगा..उसको उस बात से कोई लेना देना नहीं। 

क्या हुआ तेरा वादा

अब आप चंदौली के सदर एसडीएम साहब की ही बात को ले लीजिए..कल साहब ने चक्का जाम हटाने के लिए यह कह दिया कि पहले मंडी समिति में आ चुके धान की खरीद होने के बाद ही दूसरे धान की खरीद ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीके से होगी। यह कहकर साहब फुर्र हो गए..तो क्या एसडीएम साहब अपने आश्वासन को पूरा कराने के लिए आज क्रय केन्द्रों पर जाएंगे..क्या यह उन्होंने केवल अपने सिर की बला टालने के लिए कह दिया है। जब शुक्रवार की सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर उस आदेश का पालन कराने के लिए फोन किया तो उनका फोन स्विच ऑफ बता रहा था।

 यह बात चंदौली जनपद के निर्वाचित सांसद और 3 विधायकों को भी समझ में नहीं आ रही है, क्योंकि वह सरकार के अधिकारियों के द्वारा किए जा रहे मनमाने फैसले के आगे बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं।

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विधायकों की कार्यशैली पर नाराजगी

 आपको बता दें कि चंदौली जनपद में समीक्षा बैठकों और अधिकारियों से लगातार मुलाकात करके चंदौली जिले के जनप्रतिनिधि जिले की समस्याओं पर चर्चा और बातचीत किया करते हैं, लेकिन चंदौली जिले की धान खरीद की समस्या अभी तक हल नहीं हो पाई। आए दिन क्रय केंद्रों पर तमाम तरह की लापरवाही देखने को मिलती है, तो वहीं कई केंद्रों पर धान खरीद के बाद भुगतान की समस्या आ गई है। कुछ इलाकों में विधायक सुशील सिंह ने क्रय केंद्रों पर की जा रही है गड़बड़ी को पकड़ा था और कार्यवाही के निर्देश दिए थे। ऐसी गलती उसके बाद और भी कई केंद्रों पर चल रही है, लेकिन विधायक जी उसके बाद किसी और जगह की समस्या दूर नहीं करा पाए। विधायक सुशील सिंह को कम से कम सैयदराजा के सारे क्रय केन्द्र अप टू डेट करा देने चाहिए थे। तभी उनकी सक्रियता का कोई मतलब है। अगर उनके इक्का दुक्का प्रयास के बाद भी किसानों की समस्या दूर नहीं हुई तो उनकी कार्यशैली व सरकार में हनक पर सवाल उठना लाजिमी हैं।

साधना सिंह को सलाह

 वहीं मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के किसान अपने विधायक की कार्यशैली से नाराज हैं उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि विधायक जी को चुनाव जीतना है तो अब तक किसानों के साथ बैठकर प्रशासन के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए, जैसे वह तब व्यापारियों के लिए लड़ती थीं..जब उनकी सरकार नहीं थी। बंद कमरे में और चंद किसानों के साथ मिलकर पूरे मामले को वह सुलझा नहीं सकती हैं। वह तब मदद कर पाएंगी जब उनको असली हकीकत पता होगी। चंदौली जिले में धान की खरीद तभी सही तरीके से हो पाएगी। 

एक किसान ने कहा कि आला अधिकारियों से बातचीत करने में चंदौली जिले के छोटे और बड़े सभी तरह के किसान शामिल हों और सबकी बात सुनकर मामले का हल निकाला जाय। सत्ताधारी पक्ष के करीबी और बड़े राजनेताओं के खास खास लोगों के धान भले ही गए हों, लेकिन छोटे और आम काश्तकार आज भी परेशान हैं। अगर सबकुछ चंदौली जिले में सही तरीके से चल रहा है तो किसान परेशान किस बात के लिए है। अगर यह बात राजनेताओं और अधिकारियों को समझ में नहीं आएगी तो आने वाले विधानसभा चुनाव में किसान खुद अपना वोट देकर समझाने की कोशिश करेंगे।

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शारदा प्रसाद के खिलाफ भी है गुस्सा

 चकिया विधानसभा क्षेत्र के किसान भी अपने जनप्रतिनिधि के द्वारा चुनावी कार्यक्रमों में अधिक समय लगाने तथा धान क्रय केंद्रों की ओर ध्यान न देने की वजह से काफी नाराज हैं। एक किसान ने कहा कि सम्मेलन और कार्यक्रम करके विधायक जी दोबारा विधायक नहीं बन पाएंगे। उन्हें जनता के बीच में जाकर किसानों के दुख दर्द को समझना चाहिए और चकिया इलाके के किसानों की धान खरीद की व्यवस्था बेहतर तरीके से सुनिश्चित करानी चाहिए।

 वहीं नौगढ़ इलाके के एक किसान ने कहा कि धान बेचने की समस्या और शिकायत को लेकर नौगढ़ इलाके में कई दिन से किसान नेता धरने पर बैठे हैं। यह बात विधायक जी को नहीं दिख रही है और न ही अधिकारी उन पर कोई संज्ञान ले रहे हैं। अगर उनका धरना प्रदर्शन नाजायज है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए और अगर जायज है तो उनकी बात सुनकर समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।