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3 साल में नहीं दे पाए डॉक्टर : 67 लाख का पशु अस्पताल बना शोपीस, माधोपुर पशु चिकित्सालय का क्या है भविष्य..?

चंदौली के माधोपुर में 67 लाख की लागत से बना पशु चिकित्सालय विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ गया है। नियमित डॉक्टर न होने से दर्जनों गांवों के पशुपालक परेशान हैं। जानिए क्यों करोड़ों का यह भवन आज सफेद हाथी साबित हो रहा है।

 
 

लाखों की लागत वाला अस्पताल खंडहर बनने की कगार पर

सप्ताह में सिर्फ एक दिन दो घंटे खुलता है ताला

इलाज के अभाव में पशुपालकों को झेलना पड़ रहा भारी नुकसान

सैयदराजा विधानसभा के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बेहद आक्रोशित

 चंदौली जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां विकास के दावों और धरातल की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर नजर आता है। जनपद के सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले माधोपुर गांव में स्थित पशु चिकित्सालय वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लगभग 67 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह अस्पताल आज स्थानीय पशुपालकों के लिए केवल एक शोपीस बनकर रह गया है। आलम यह है कि अस्पताल की इमारत तो खड़ी है, लेकिन इसके भीतर पशुओं का उपचार करने वाले डॉक्टर और कर्मचारी नदारद रहते हैं।

तीन साल पहले हुआ था उद्घाटन
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस चिकित्सालय का निर्माण बड़ी उम्मीदों के साथ कराया गया था। करीब तीन साल पहले जब इसका भव्य उद्घाटन हुआ, तब महुरा, करकरा, मणिपटती, पप्परौल और डवरिया जैसे एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालकों को लगा था कि अब उनके मवेशियों को समय पर इलाज मिल सकेगा। हालांकि, यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी। जिले में पशु चिकित्सकों की भारी कमी का हवाला देकर विभाग ने इस केंद्र को लगभग लावारिस छोड़ दिया है। आज स्थिति यह है कि इलाज के अभाव में कई पशु समय से पहले ही दम तोड़ देते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक क्षति पहुंच रही है।

सिर्फ दो घंटे होता है जानवरों का इलाज 
इस अव्यवस्था के बीच चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल सप्ताह में केवल एक दिन यानी शुक्रवार को मात्र दो घंटे के लिए खुलता है। संबंधित पशु चिकित्सक डॉ. आनंद कुमार का कहना है कि उनकी मुख्य नियुक्ति धानापुर में है और ग्रामीणों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए वे सप्ताह में एक दिन यहां सेवा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अस्पताल में वर्तमान में किसी भी स्थाई चिकित्सक या कर्मचारी की तैनाती नहीं है। इस रिक्तता के कारण पूरे क्षेत्र की पशु स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दी जा चुकी है।

पशुपालकों ने उठाई नियमित तैनाती की मांग
गुरैनी, पांडेयपुर, सिसौदा और वीरासराय जैसे गांवों के पशुपालकों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही यहां स्थाई व्यवस्था नहीं की, तो करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। पशुपालकों की मांग है कि माधोपुर पशु चिकित्सालय को पूर्णकालिक रूप से संचालित किया जाए ताकि क्षेत्र के हजारों बेजुबान जानवरों की जान बचाई जा सके और किसानों को निजी डॉक्टरों के महंगे खर्च से राहत मिल सके।

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