कागजों में सिमटा कुपोषण से जंग का अभियान, नहीं दिखते हैं आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन के पौधे
आंगनबाड़ी केंद्रों पर हकीकत उजागर
कागजों में ही चल रहा पौधारोपण अभियान
बाल व पुष्टाहार विभाग की उदासीनता सामने आई
1873 आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन पौधे नदारद
चंदौली जिले में शासन ने बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन के पौधों के रोपण का निर्देश दिया था। सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है और इसे बच्चों के पौष्टिक आहार के रूप में शामिल करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जनपद के आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन के पौधे कहीं नजर नहीं आ रहे। पौधारोपण केवल कागजों तक सीमित है।
शासन का लक्ष्य और विभागीय उदासीनता
आपको बता दें कि पौधारोपण वर्ष 2025-26 के तहत जिले में 63 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्राम विकास विभाग और अन्य विभागों की ओर से सामुदायिक भूमि, परती भूमि, नदी किनारे और सड़कों के किनारे पौधारोपण कराया भी गया। लेकिन बाल व पुष्टाहार विभाग, जिसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन का पौधारोपण करना था, पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
1873 आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं दिख रहे पौधे
चंदौली जिले में इस समय 1873 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। लेकिन इनमें से किसी भी केंद्र पर सहजन के पौधे रोपित होते नजर नहीं आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी और कर्मचारी पौधारोपण का रिकॉर्ड तो बना रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा।
कुपोषण से जंग या खानापूर्ति?
शासन की मंशा थी कि सहजन की फली, पत्ते और फूल बच्चों को पोषण देंगे और उनकी सेहत में सुधार होगा। सहजन में दूध से चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है। इसके बावजूद पौधे न लगना इस योजना की खानापूर्ति को दर्शाता है।
सीडीओ का बयान
इस मामले पर सीडीओ आर. जगत सांई ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन का पौधारोपण कराने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। यदि कहीं पौधे नहीं लगाए गए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग लापरवाह रहेगा तो कुपोषण से जंग का अभियान सिर्फ फाइलों और रिपोर्टों तक सीमित रह जाएगा।
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