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मनरेगा के 10 हजार अधूरे काम होंगे डेड घोषित, 30% से कम खर्च वाले प्रोजेक्ट्स पर कसने लगा शिकंजा

मनरेगा के तहत स्वीकृत लागत का 30 प्रतिशत या उससे कम खर्च वाले करीब 10 हजार कामों को डेड घोषित किया जाएगा। इसके लिए पंचनामा, पांच गवाहों का सत्यापन और जीपीएस आधारित फोटो अनिवार्य कर दी गई है।

 
 

30 प्रतिशत से कम खर्च वाले काम होंगे डेड

करीब 10 हजार अधूरे कार्यों की शुरू हुई छंटनी

5 गवाहों के सत्यापन के बाद बनेगा पंचनामा

मौके की जीपीएस फोटो पोर्टल पर होगी अपलोड

निष्प्रभावी कार्यों का तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सालों से बंद पड़े और अधूरे कामों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। योजना के तहत स्वीकृत बजट का 30 प्रतिशत या उससे कम खर्च वाले करीब 10 हजार कामों को अब 'डेड' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने इस संबंध में सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ऐसे सभी निष्प्रभावी और अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स का स्थलीय पंचनामा तैयार कर उनका पूरा ब्योरा डिजिटल पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।

वर्ष 2006 से अब तक के कामों की हो रही है छंटनी
मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2006 से लेकर अब तक कराए गए ऐसे सभी निर्माण व विकास कार्यों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन पर स्वीकृत लागत का 30 फीसदी या उससे कम पैसा खर्च हुआ है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन व्यवस्था भी विकसित की है। इसका मुख्य उद्देश्य कागजों में लटके और लंबे समय से बंद पड़े पुराने कामों का मौके पर जाकर सत्यापन करना और सरकारी अभिलेखों को पूरी तरह से अद्यतन (अपडेट) करना है।

5 गवाहों का सत्यापन और पंचनामा अनिवार्य
जारी किए गए नए निर्देशों के अनुसार, जिन कामों की जियो-टैगिंग पहले से पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, उनका मौके पर जाकर पंचनामा तैयार किया जाएगा। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रत्येक कार्य के सत्यापन में कम से कम पांच स्थानीय गवाहों का होना अनिवार्य किया गया है। गवाहों को यह लिखकर प्रमाणित करना होगा कि कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है, अब तक कितना भुगतान हुआ है, काम बंद होने की वजह क्या थी और वर्तमान में स्थल पर कितना निर्माण हुआ है। कार्यक्रम अधिकारी इन सभी तथ्यों को दर्ज कर रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करेंगे।

जीपीएस आधारित फोटो से मिलेगी असली तस्वीर
सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए जीपीएस (GPS) आधारित फोटो प्रणाली को लागू किया गया है। जांच टीम को मौके पर जाकर वर्तमान स्थिति की लाइव जीपीएस फोटो खींचनी होगी, जिसमें लोकेशन और समय दर्ज रहेगा। इन तस्वीरों को संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना बेहद अनिवार्य होगा, जिससे कार्य की वास्तविक और प्रामाणिक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड हमेशा के लिए उपलब्ध रहे। फोटो में कार्य स्थल और कराए गए निर्माण को स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा।

अभिलेखों का होगा सुधारीकरण, निगरानी होगी आसान
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने बताया कि वित्तीय वर्ष में मनरेगा के स्थान पर शुरू की गई बीबीएलजी रामजी प्रणाली में भी ऐसे सभी चिन्हित कार्यों का विवरण दर्ज किया जाएगा। सभी जिलों से अंतिम रिपोर्ट मिलते ही कम खर्च वाले कार्यों को डेड घोषित करने की विभागीय कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कदम से सालों से लंबित और निष्प्रभावी कार्यों का अलग से अभिलेखीकरण (रिकॉर्ड) हो जाएगा। इससे भविष्य में नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और उनकी प्रभावी निगरानी करने में काफी सहूलियत मिलेगी।

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