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जंतर-मंतर से फेसबुक तक सांसद खरवार का बड़ा हमला: पूर्व पीएम अटल जी के बयान से छेड़ी 'तानाशाही' की बहस

सोनभद्र के सांसद कुंवर छोटेलाल सिंह खरवार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के बयान को फेसबुक पर शेयर कर केंद्र सरकार पर बड़ा वैचारिक हमला बोला है।

 

जंतर-मंतर पर सांसद खरवार का प्रदर्शन

अटल बिहारी वाजपेयी के बयान से वार

लोकतंत्र बनाम तानाशाही की छेड़ी बहस

विपक्षी सांसदों का संसद तक मार्च

फेसबुक पोस्ट से गरमाया सियासी तापमान

दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विपक्ष का बड़ा धरना, वहां से संसद तक पैदल विरोध मार्च और फिर उसके महज 24 घंटे के भीतर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक शब्दों का सहारा! सोनभद्र के समाजवादी पार्टी सांसद कुंवर छोटेलाल सिंह खरवार ने लगातार दो दिनों के भीतर ऐसे सियासी कदम उठाए हैं, जिसने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

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जंतर-मंतर के प्रदर्शन में रहे सबसे आगे
सोमवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों का विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित हुआ था। इस प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के प्रमुख सांसदों के साथ सोनभद्र सांसद कुंवर छोटेलाल सिंह खरवार भी पूरी मजबूती से शामिल हुए। इसके बाद जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए पैदल विरोध मार्च में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने युवाओं के रोजगार, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और मौजूदा सरकारी नीतियों के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई।

अटल जी के ऐतिहासिक शब्दों से साधा निशाना
धरना और संसद मार्च खत्म होने के ठीक 24 घंटे बाद यानी मंगलवार को सांसद खरवार ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज से एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला। उन्होंने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक मशहूर और बेहद चर्चित कथन साझा किया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा— "देखिए अंतर... वो क्या कहते थे और ये क्या कहते हैं।"

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'विरोधी को गद्दार मानना ही तानाशाही का उदय'
सांसद खरवार ने अटल जी के जिस बयान को शेयर किया, उसमें लिखा था कि "जहां विरोध और विरोधियों को गद्दार मानने का भाव आ जाए, वहां से लोकतंत्र समाप्त होने लगता है और तानाशाही का उदय होता है।" राजनीतिक पंडितों और जानकारों का मानना है कि इस पुरानी बात के बहाने सांसद ने सीधे तौर पर मौजूदा केंद्र सरकार की कार्यशैली और सोच पर बड़ा वैचारिक हमला बोला है।

क्या विपक्ष ने बदल दी सरकार को घेरने की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के अंदर हंगामा, जंतर-मंतर की सड़कों पर धरना और फिर सोशल मीडिया के जरिए सरकार की घेराबंदी—यह विपक्ष की एक सोची-समझी नई रणनीति का हिस्सा है। सांसद छोटेलाल खरवार की यह पोस्ट महज एक सामान्य सोशल मीडिया शेयर नहीं है, बल्कि इसने देश में अभिव्यक्ति की आजादी, असहमति के सम्मान और लोकतंत्र के भविष्य पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल, बढ़ा सियासी तापमान
सांसद की यह फेसबुक पोस्ट इस समय सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रही है। उनके समर्थक इसे लोकतंत्र और संविधान को बचाने की एक मजबूत आवाज बता रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में इसे केंद्र सरकार के खिलाफ अब तक का सबसे तीखा हमला माना जा रहा है। हालांकि, इस चर्चित पोस्ट को लेकर अभी तक भारतीय जनता पार्टी या केंद्र सरकार की तरफ से कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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