CMO साहब इसे कौन देखेगा...वार्डों में नहीं रहती चिकित्सकों की ड्यूटी, भर्ती मरीज भगवान भरोसे
वार्डों में दो बजे बाद नहीं रहते चिकित्सक
स्टाफ नर्सों और वार्ड ब्वॉय के सहारे चल रहा जिला अस्पताल
जिला अस्पताल की लापरवाही से मरीज परेशान
प्राचार्य बोले—लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई
चंदौली जिले के पं. कमलापति त्रिपाठी जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। वार्डों में भर्ती मरीजों का उपचार भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। दोपहर दो बजे के बाद वार्ड में कोई चिकित्सक नहीं रहता। ऐसे में भर्ती मरीजों का इलाज महज स्टाफ नर्सों के सहारे चलता है। यह स्थिति तब है जबकि नियम के अनुसार प्रत्येक वार्ड में मरीजों की देखरेख के लिए चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।
नर्सों के सहारे मरीजों का इलाज
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से वार्डों में चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगाई जाती। परिणामस्वरूप गंभीर मरीजों को भी नर्सों और वार्ड ब्वॉय पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी की स्थिति आने पर वार्ड ब्वॉय ही टांके लगाने और पट्टी करने का कार्य करने लगते हैं।
स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज
जिला अस्पताल 100 बेड का है और बाबा कीनाराम चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध है। यहां पुरुष, महिला, अस्थि, प्रसूता सहित कई वार्ड संचालित हैं। लेकिन सभी बेड हमेशा फुल रहते हैं। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर ही भर्ती करना पड़ता है। यहां तक कि कई बार डेंगू के लिए आरक्षित वार्ड में भी सामान्य मरीजों को भर्ती करना पड़ा है।
अव्यवस्था से बढ़ रहा विवाद
अस्पताल में अव्यवस्था के कारण आए दिन विवाद की स्थिति बनती है। पिछले सप्ताह वार्ड कूलर खराब हो गया था। उमसभरी गर्मी से मरीज व उनके तीमारदार बेहाल हो गए। इस पर नाराज होकर तीमारदारों ने हंगामा कर दिया। तीमारदार सुजीत सिंह, कैलाश पाठक, रत्नेश यादव, दिनेशचन्द्र, सुशीला, रमावती मौर्य आदि का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस.पी. सिंह ने कोई कदम नहीं उठाया।
चिकित्सक सिर्फ सुबह राउंड लगाते
मरीजों ने बताया कि चिकित्सक सुबह राउंड तो लेते हैं लेकिन शाम को वार्ड में कोई चिकित्सक दिखाई नहीं देता। इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों को भी जब वार्ड के मरीज की जरूरत होती है, तब बुलाया जाता है। लेकिन एक साथ कई घायल पहुंच जाएं तो इमरजेंसी डॉक्टर वार्ड में नहीं पहुंच पाते।
गायनी और एसएनसीयू में भी लापरवाही
अस्पताल में गायनी विभाग और एसएनसीयू में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। मगर मरीज आनंद तिवारी, रामकिशुन प्रजापति, महेश गौतम, शिखा जायसवाल, साक्षी त्रिपाठी आदि का कहना है कि शाम होते ही यहां के चिकित्सक भी घर चले जाते हैं। स्टाफ नर्सों की संख्या का भी सही आंकड़ा अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं है। मनमाने ढंग से कर्मियों की ड्यूटी लगा दी जाती है।
प्रशासन का पक्ष
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर ऑनकॉल चिकित्सक 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक भी आवश्यकता पड़ने पर अन्य वार्डों के मरीजों को देखते हैं।
इस मामले पर चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमित सिंह ने कहा कि “यदि कोई चिकित्सक दायित्व का निर्वहन नहीं कर रहा है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। ऑनकॉल चिकित्सक हर समय उपलब्ध रहते हैं।”
जनता में आक्रोश
अस्पताल की दुर्व्यवस्था से आम मरीज और उनके परिजन आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि जिला मुख्यालय पर स्थित सबसे बड़े अस्पताल का यह हाल है तो दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
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