वाह रे सेक्रेटरी साहब- जीते जी महिला को मार डाला, साल भर से बंद है पेंशन

ग्राम विकास अधिकारी की बड़ी लापरवाही
जिंदा गरीब महिला को कागजों में मृत दिखाकर रोकवा दी पेंशन
वृद्धा पेंशन के मामले में प्रधान व सेक्रेटरी ने मिलकर किया है बड़ा खेल
चंदौली जनपद में गंवई राजनीति के चक्कर में पड़कर ग्राम विकास अधिकारी में जानबूझकर कुछ ऐसी हरकत कर दिया करते हैं, जिससे कि पूरे सरकारी महकमे पर सवालिया निशान लग जाता है। एक ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा ग्राम प्रधान से मिलकर एक गरीब महिला का वृद्धावस्था पेंशन काट दिया गया है और जीवित महिला को मृत बता दिया गया है। इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अमादपुर गांव की रहने वाली दीपावली देवी ने इस बात की शिकायत की। अब मामले में जांच पड़ताल करने का नाटक किया जा रहा है।

मामले में बताया जा रहा है कि धानापुर विकास खंड के अमादपुर गांव में एक जीवित महिला की वृद्धवस्था पेंशन काटने के लिए उसे जीते जी मार डाला गया है। गांव की एक जीवित गरीब बुजुर्ग महिला को अभिलेखों में ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम प्रधान के द्वारा जानबूझकर मृत दिखाकर उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी गई, ताकि उसके बदले किसी और को पेंशन दिलवा सकें।

बताते चले कि अमादपुर की रहने वाली दीपावली देवी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद से वृद्धा पेंशन मिल रही थी। आरोप है कि ग्राम प्रधान के इशारे पर ग्राम पंचायत अधिकारी ने 2024 में उन्हें मृत दिखाते हुए समाज कल्याण कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी। इस गलत रिपोर्ट के कारण पिछले एक साल से उनकी पेंशन बैंक में आना बंद हो गई है। जब दीपावली देवी ने बैंक के साथ-साथ ब्लॉक में पूछताछ की तो मामले का खुलासा हुआ है।
पीड़िता ने बताया कि काफी खोजबीन के बाद उन्हें पता चला कि उन्हें अभिलेखों में मृत दिखाया गया है। महिला ने ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी पर पेंशन बंद करवाने का आरोप लगाया है।
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इस मामले में धानापुर के एडीओ समाज कल्याण के पद पर तैनात सौरभ सिंह ने कहा कि अमादपुर गांव में जीवित महिला को मृत दिखाए जाने की सूचना मिली है। ग्राम विकास अधिकारी की रिपोर्ट की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में दोषी पाए जाने पर ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गरीब व बुजुर्ग महिलाओं से जुड़ा मामला इसलिए गंभीर हो जाता है, क्योंकि एक गरीब बुजुर्ग महिला की आजीविका और जरूरी खर्चे पेंशन पर ही निर्भर होते हैं। तभी तो ऐसी महिलाएं इसका इंतजार करती हैं। अब देखना है कि एडीओ समाज कल्याण सौरभ सिंह अपनी जांच के बाद क्या कार्रवाई करते हैं या मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
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