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पंचायत सहायक नहीं करना चाहते हैं डिजिटल क्रॉप सर्वे, क्षेत्रीय विधायकों को सौंपा अपना ज्ञापन

सर्वे के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी पंचायत सहायकों की नाराजगी का कारण है। यूनियन ने कहा कि यह भुगतान प्रति गाटा/प्लॉट के आधार पर किया जाएगा, जो बेहद कम है और मेहनत के हिसाब से उचित नहीं है।
 

पंचायत सहायक यूनियन ने क्रॉप सर्वे के आदेश पर जताया कड़ा विरोध

तकनीकी संसाधनों के अभाव को बताया बड़ा कारण

प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि को बताया अनुचित

मुख्य कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई

चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश पंचायत सहायक यूनियन ने एग्रीस्टैक के तहत चलाए जा रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर अपनी असमर्थता जाहिर की है। पंचायत सहायकों ने चकिया विधायक कैलाश आचार्य, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह और ADPRO को ज्ञापन सौंपकर इस कार्य से उन्हें अलग करने की मांग की है। उनका कहना है कि संसाधनों की भारी कमी, कार्य की जटिलता, सुरक्षा जोखिम और कम प्रोत्साहन राशि के चलते यह कार्य उनके लिए संभव नहीं है।

Panchayat sahayak gyapan

संसाधनों की भारी कमी

  • यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए पंचायत सहायकों के पास आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
  • सर्वे के लिए GPS और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा वाले स्मार्टफोन की जरूरत है, जो अधिकांश पंचायत सहायकों के पास नहीं है।
  • कई पंचायतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है, जिससे रीयल टाइम डेटा अपलोड करना संभव नहीं हो पाता।
  • फील्ड में काम करते समय पावर बैंक, रेनकोट, जूते और अन्य जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

एकल कर्मचारी व्यवस्था पर दबाव

ग्राम पंचायत सचिवालय में पंचायत सहायक ही एकमात्र कर्मचारी होता है। ऐसे में फील्ड में जाकर सर्वे करने पर सचिवालय का काम ठप हो जाता है।
पंचायत सहायकों का कहना है कि वे पहले से ही जन्म-मृत्यु पंजीकरण, विवाह पंजीकरण, सरकारी योजनाओं का पोर्टल एंट्री, लाभार्थियों का चयन, ग्राम सभा की कार्यवाही, वित्तीय रिपोर्टिंग जैसे कार्यों में व्यस्त रहते हैं। डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसे जटिल फील्ड वर्क को जोड़ने से उनके नियमित कार्य प्रभावित होंगे।

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कृषि विभाग का कार्य, पंचायती राज पर बोझ

यूनियन ने स्पष्ट किया कि डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरी तरह से कृषि विभाग का कार्य है। पंचायत सहायकों को इसे कराने का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना है कि इस कार्य में किसानों के खेतों में जाकर फसल की स्थिति, क्षेत्रफल और गाटा संख्या का डिजिटल सत्यापन करना होता है, जो कृषि विभाग के फील्ड स्टाफ के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कम प्रोत्साहन राशि पर नाराजगी

सर्वे के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी पंचायत सहायकों की नाराजगी का कारण है। यूनियन ने कहा कि यह भुगतान प्रति गाटा/प्लॉट के आधार पर किया जाएगा, जो बेहद कम है और मेहनत के हिसाब से उचित नहीं है। उनकी मांग है कि इस कार्य के लिए निश्चित और सम्मानजनक मानदेय तय किया जाए, ताकि मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके।

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सुरक्षा जोखिम और बीमा की मांग -

  •     मानसून के दौरान खेतों में सर्वे करने के दौरान पंचायत सहायकों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
  •     खेतों में जंगली जानवर, सांप-बिच्छू के हमले का खतरा रहता है।
  •     महिला पंचायत सहायकों के लिए अकेले खेतों में सर्वे करना असुरक्षित है।

यूनियन ने मांग की कि सर्वे के दौरान किसी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में ₹10 लाख का मुआवजा और मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा, सर्वे के दौरान कार्यरत सभी सहायकों का बीमा भी कराया जाए।

मुख्य मांगें -

  •     उच्च क्षमता वाले GPS स्मार्टफोन की उपलब्धता।
  •     निश्चित और सम्मानजनक मानदेय।
  •     दुर्घटना और जीवन बीमा।
  •     कार्य का श्रेय पंचायत सहायकों को मिले।
  •     महिला सहायकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था।

ज्ञापन सौंपा गया - 

यूनियन के सदस्यों ने चकिया विधायक कैलाश आचार्य, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह और एडीपीआरओ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पंचायत सहायक इस कार्य को करने में असमर्थ रहेंगे।

यूनियन की चेतावनी -

पंचायत सहायकों ने साफ कहा कि वे किसी भी स्थिति में बिना संसाधन और सुरक्षा के डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह निर्णय संगठन स्तर पर लिया गया है और यदि दबाव बनाया गया तो वे सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराएंगे।

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