चंदौली को आज PM मोदी देंगे एक खास तोहफा, प्रदेश की पहली 'स्टेट ऑफ द आर्ट' फिश मार्केट का होगा उद्घाटन
प्रधानमंत्री आज करेंगे देश के पहले 'स्टेट ऑफ द आर्ट' फिश मार्केट का उद्घाटन
चंदौली बनने जा रहा है मत्स्य व्यवसाय का नया हब
कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद भी होंगे कार्यक्रम में शामिल
उत्तर प्रदेश का चंदौली जिला अब मत्स्य पालन और थोक मछली व्यवसाय के क्षेत्र में देश भर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने को तैयार है। आज (शनिवार को) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के नेशनल एग्रीकल्चर साइंस कांप्लेक्स (NASC) से वर्चुअल माध्यम से चंदौली में निर्मित देश के पहले 'स्टेट ऑफ द आर्ट' होलसेल फिश मार्केट का उद्घाटन करेंगे। लगभग 65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह अत्याधुनिक मंडी मत्स्य पालकों और व्यवसायियों के लिए एक नई क्रांति लाएगी।
चंदौली में आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री (मत्स्य विभाग) डॉ. संजय निषाद मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे। दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे पर एक हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। इस परियोजना की लागत में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का है। इसके अलावा, मंडी परिषद द्वारा भी 10 करोड़ रुपये की धनराशि का योगदान किया गया है।

अल्ट्रा-मॉडर्न सुविधाओं से लैस तीन मंजिला इमारत
जिलाधिकारी (डीएम) चंद्र मोहन गर्ग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10,000 वर्ग मीटर में फैली यह तीन मंजिला आधुनिक इमारत मत्स्य पालन से जुड़े कारोबारियों को अभूतपूर्व और आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगी। यह देश की अपनी तरह की पहली ऐसी अल्ट्रा-मॉडल बिल्डिंग है, जो केवल मत्स्य सम्बंधित कारोबार पर आधारित है।
इस मंडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मछली पालन से संबंधित सभी आवश्यक संसाधन—जैसे बीज (सीड्स), चारा (फीड्स), दवाएं और उपकरण—एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, मंडी में मछली का थोक (होलसेल) और खुदरा (रिटेल) बाजार, मछली पालन के आधुनिक तरीके (तकनीक), मार्केटिंग रणनीतियों और निर्यात (एक्सपोर्ट) संबंधी जानकारी भी उपलब्ध होगी। तीसरी मंजिल पर एक एक्सक्लूसिव फिश रेस्टोरेंट भी है, जिसका संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाएगा, जहां मछली के कई प्रकार के व्यंजन (डिशेज व कुजीन) का जायका उपलब्ध होगा। मत्स्य विभाग के उपनिदेशक विजय पाल ने बताया कि इस मंडी में कुल 111 दुकानें होंगी, जिनके आवंटन की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है।
रोजगार और आय में वृद्धि की अपार संभावना
डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने बताया कि इस आधुनिक मंडी के बनने से पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर में लगभग 1,500 मत्स्य पालक बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं और 3,000 से अधिक परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इस मंडी के माध्यम से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मत्स्य पालकों और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
इसके अलावा, मछली पालन से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण के लिए एक कॉन्फ्रेंस हॉल और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी सुविधाएं भी यहां मौजूद हैं। ऊर्जा संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इस मंडी में 400 किलोवाट का सोलर पावर सिस्टम भी स्थापित किया गया है।
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