कौन सुनेगा इन लोगों का दर्द : रेवसां में 30 घंटे से भूख हड़ताल पर बैठी महिलाएं, सत्तापक्ष के नेता और प्रशासन मौन
रेवसा बस्ती बचाओ संघर्ष समिति का धरना जारी
भूखी महिलाओं का 30 घंटे का धरना जारी
फर्जी मुकदमों में फंसाए गए साथियों की रिहाई तक आंदोलन रहेगा जारी
रेवसां में भूखी महिलाओं ने दी उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
8 परिवारों को नहीं मिला है जमीन का मुआवजा
चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के रेवसा गांव में किसानों, मजदूरों और भूमिहीनों के अधिकारों की लड़ाई पिछले कई महीनों से चल रही है। इसी कड़ी में, भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं और बच्चियों का क्रमिक अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 30 घंटे पार कर गया। यह विरोध प्रदर्शन भाकपा (माले) के तत्वावधान में रेवसा बस्ती बचाओ संघर्ष समिति द्वारा किया जा रहा है।
हालांकि, विरोध प्रदर्शन के 30 घंटे बीत जाने के बावजूद, अब तक कोई भी उच्च अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक चुप्पी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
ब्रेकिंग: चंदौली में महिलाओं का अनिश्चितकालीन धरना जारी!
— Chandauli Samachar (@chandaulinews) November 2, 2025
रेवसा गांव में भूख हड़ताल को 24 घंटे पूरे — फर्जी मुकदमों में फंसे साथियों की रिहाई की मांग, उच्च अधिकारी अब तक नहीं पहुंचे… महिलाओं ने चेताया — अबकी बार आंदोलन होगा उग्र@dmchandauli @langeh_ips #Chandauli pic.twitter.com/KKht6zTb1r
मिशन शक्ति पर सवाल
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार भले ही महिलाओं के सम्मान और 'मिशन शक्ति' की बात करती हो, लेकिन रेवसा के धरना स्थल पर इसका असर बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। भूखी हड़ताल पर बैठी महिलाओं की पीड़ा के प्रति प्रशासन की यह चुप्पी, सरकार के दावों की सच्चाई उजागर कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगों में शामिल है:
1-बेदखली पर रोक लगाने की गुहार: किसानों, गरीबों और भूमिहीनों को उनकी जमीन, मकान और जीवनोपयोगी वस्तुओं का शत-प्रतिशत उचित मुआवजा दिए बिना किसी भी प्रकार की बेदखली या मकान तोड़ने की कार्रवाई को तत्काल रोका जाए।
2-मुआवजा और पट्टा की मांग: प्रभावित परिवारों को ग्रामसभा की भूमि पर पट्टा दिया जाए, और अधिसूचना के साथ रेट तथा मुआवजा राशि की पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

3-क्षतिपूर्ति करने की मांग: हैंडपंप, कुआं, बाउंड्री और पेड़ों का अलग से मुआवजा तय किया जाए।
4-फर्जी मुकदमे में फंसाकर परेशान करने की पहल: फर्जी मुकदमों में फंसाए गए साथियों की तत्काल रिहाई हो और दोषियों के खिलाफ नियोजित कार्रवाई की जाए।
5-कर्ज माफी की मांग भी जायज: बकाया बिजली बिल और माइक्रोफाइनेंस कर्ज माफ किए जाएं।
ग्रामीणों ने बताया कि रामदुलारे, बड़ी प्रसाद, उमा देवी, विनोद कुमार, सोमनाथ, सुभाष चंद्र, शिवपूजन और राधेश्याम सहित आठ परिवारों को जमीन और मकान अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चलने के बावजूद, अब तक कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है और न ही मुआवजा मिला है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को न्याय, मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। गांव की महिलाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रशासन ने अगर जल्द समाधान नहीं निकाला तो धरना उग्र रूप लेगा/तेज़ किया जाएगा।
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