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शारदीय नवरात्र आज से शुरू, घर-घर होगी कलश स्थापना

नवरात्र के दौरान साधक शक्ति साधना, जप-तप, अनुष्ठान एवं हवन करेंगे।
 

नवरात्र आज से शुरू

घर-घर होगी कलश स्थापना

कलश स्थापना के लिए सुबह विशेष मुहूर्त

नौ दिनों तक होंगे देवी के स्वरूप पूजन

शक्ति की उपासना का महान पर्व शारदीय नवरात्र आज सोमवार, 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। यह नवरात्र इस बार दस दिनों का होगा और एक अक्टूबर को महानवमी के साथ इसका समापन होगा। पहले दिन घर-घर में श्रद्धालु माता दुर्गा की स्थापना एवं कलश पूजन करेंगे।
शुभ मुहूर्त और विशेष योग

ज्योतिर्विद पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातः 6 बजे से दोपहर तक रहेगा।

  •     अभिजीत मुहूर्त: 11:33 बजे से 12:23 बजे तक
  •     अमृत मुहूर्त: सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक
  •     दूसरा मुहूर्त: सुबह 8:30 से 10:30 बजे तक

इस वर्ष माता का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो अधिक वर्षा का संकेत है। वहीं माता का गमन मानव कंधे पर होगा, जिसे अत्यंत शुभ और सुखदायक माना गया है। इस बार आश्विन शुक्ल चतुर्थी की वृद्धि होने से पक्ष 16 दिनों का रहेगा।


साधना और अनुष्ठान

नवरात्र के दौरान साधक शक्ति साधना, जप-तप, अनुष्ठान एवं हवन करेंगे। गायत्री परिवार के अनुयायी गायत्री महायज्ञ एवं अनुष्ठान करेंगे, वहीं तांत्रिक साधक इस काल में विशेष साधनाएं आरंभ करेंगे। श्रद्धालु 9 दिनों तक माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे।
नौ देवी स्वरूपों की पूजा तिथियां

  •     22 सितंबर: प्रतिपदा – शैलपुत्री पूजन
  •     23 सितंबर: द्वितीया – ब्रह्मचारिणी पूजन
  •     24 सितंबर: तृतीया – चंद्रघंटा पूजन
  •     25 सितंबर: चतुर्थी – कुष्मांडा पूजन
  •     27 सितंबर: पंचमी – स्कंदमाता पूजन
  •     28 सितंबर: षष्ठी – कात्यायनी पूजन
  •     29 सितंबर: सप्तमी – कालरात्रि पूजन
  •     30 सितंबर: महाष्टमी – महागौरी व सिद्धिदात्री पूजन
  •     1 अक्टूबर: महानवमी – बलिदान व देवी होम

विशेष पूजन व पारण

महानिशा पूजन 29/30 सितंबर की रात सप्तमी युक्त अष्टमी में होगा। संधि पूजन 30 सितंबर की मध्यरात्रि के बाद किया जाएगा। महाष्टमी और महानवमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। महानवमी का पारण 1 अक्टूबर को दोपहर 2:37 बजे से पूर्व होगा।
विजयादशमी व विसर्जन

पूरे नवरात्र व्रत का समापन 2 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद पारण से होगा। इस दिन विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा और पूरे देश में शक्ति स्वरूपा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
आस्था और उल्लास

नवरात्र केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आस्था, साधना और शक्ति का महापर्व है। वाराणसी समेत पूर्वांचल के मंदिरों और घर-घर में कलश स्थापना, घट स्थापना और दुर्गा पूजा की धूम रहेगी। भक्तजन 9 दिनों तक व्रत रखकर माता की पूजा करेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

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