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UP में मिशन-2027: 1.62 लाख बूथों के लिए BJP जिलाध्यक्षों को मिला बंगाल मॉडल वाला होमवर्क, PDA को ऐसे करेंगे फेल

उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की नींव रखने के लिए भाजपा ने लखनऊ में सभी 98 जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक बुलाई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री धर्मपाल सिंह बूथ स्तर के समीकरणों और विपक्षी रणनीतियों की समीक्षा कर कार्यकर्ताओं को जीत का नया मंत्र देंगे।

 
 

लखनऊ मुख्यालय में भाजपा दिग्गजों का जमावड़ा

1.62 लाख बूथों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य

बंगाल चुनाव के 'माइक्रो मैनेजमेंट' मॉडल पर काम

विपक्षी 'पीडीए' कार्ड को बेअसर करने की रणनीति

शक्ति केंद्र प्रभारियों की रिपोर्ट का होगा सत्यापन

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी कुरुक्षेत्र में अपनी स्थिति को अभेद्य बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से कमर कस ली है। हर विधानसभा सीट के बारीक समीकरणों को समझने और बूथ स्तर की वास्तविक राजनीतिक धड़कन को भांपने के लिए मंगलवार को लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया है। इस रणनीतिक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह सभी 98 जिलाध्यक्षों के कामकाज की कड़ी समीक्षा करेंगे।

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बूथ प्रबंधन और संगठनात्मक लक्ष्यों पर जोर
भाजपा नेतृत्व ने अगले एक महीने के भीतर उत्तर प्रदेश के 1,918 मंडलों के अंतर्गत आने वाले 27,633 शक्ति केंद्रों और कुल 1,62,459 बूथों को मथने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। संगठन की मजबूती के लिए इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनाए गए 'माइक्रो मैनेजमेंट' मॉडल को आधार बनाया गया है। इसके तहत कार्यकर्ताओं को विशेष 'होमवर्क' दिया जाएगा ताकि बूथ स्तर पर संगठन के 'नट-बोल्ट' कसकर अपनी राजनीतिक जमीन को और अधिक पुख्ता किया जा सके।

क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
साल में यह पहली बार है जब चुनावी तैयारियों को लेकर इतने व्यापक स्तर पर सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों, प्रदेश महामंत्रियों, जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों को एक साथ मंच पर बुलाया गया है। बैठक के प्रथम सत्र में सभी जिलाध्यक्षों से केंद्र संयोजकों और शक्ति केंद्र प्रभारियों की अपडेटेड सूची मांगी गई है। साथ ही मंडल प्रवास की स्थिति, प्रवासियों की संख्या और सत्यापन कार्य की वर्तमान प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जातीय समीकरण और 'पीडीए' की काट
वर्ष 2024 के लोकसभा परिणामों को एक सीख के रूप में लेते हुए भाजपा अब मिशन-2027 के लिए नए तेवर के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य विपक्ष द्वारा उछाले गए 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की धार को कुंद करना है। भाजपा की रणनीति समय-समय पर उठने वाले जातीय उबाल को संगठनात्मक एकजुटता के माध्यम से शांत करने और विकास के एजेंडे को बूथ स्तर तक ले जाने की है, ताकि यूपी में लगातार तीसरी बार सत्ता का मार्ग प्रशस्त हो सके।

अभिलेखों और समितियों का गहन विवरण तलब
संगठनात्मक ढांचे को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए पार्टी आलाकमान ने कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और सूचियाँ तलब की हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

नई बूथ समितियों का गठन और उनकी डिजिटल मैपिंग।

प्रत्येक बूथ पर निवास करने वाले जिला स्तर के दो वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की प्रमाणित सूची।

जिले की कोर कमेटी की गतिविधियों और निर्णयों की विस्तृत रिपोर्ट।

कोर कमेटी द्वारा प्रस्तावित विभिन्न प्राधिकरणों, उपभोक्ता फोरम सदस्यों और जेल विजिटरों का पैनल।

बंगाल और असम की चुनावी सफलताओं से सीख लेते हुए भाजपा अब उत्तर प्रदेश में उसी आक्रामक चुनावी शैली के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि यदि बूथ स्तर का कार्यकर्ता सजग और सक्रिय रहा, तो 2027 की राह बेहद आसान होगी। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए लखनऊ मुख्यालय में आज का यह मंथन निर्णायक माना जा रहा है।

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