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UP बनेगा पूरी तरह पेपरलेस: सरकारी दफ्तरों में अब Online होगा काम, कागज वाली फाइलें बंद, लापरवाहों पर होगा एक्शन

यूपी सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ई-ऑफिस' प्रणाली अनिवार्य कर दी है। अब सचिवालय से तहसील तक बिना डिजिटल काम के वेतन नहीं मिलेगा। जानिए, सीएम योगी के इस सख्त आदेश के पीछे की पूरी रणनीति।

 
 

वेतन पाने के लिए ई-ऑफिस सर्टिफिकेट अनिवार्य

यूपी के सरकारी दफ्तर होंगे पूरी तरह पेपरलेस

ऑफलाइन फाइलों के इस्तेमाल पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने के संकल्प के साथ योगी सरकार ने एक क्रांतिकारी फैसला लिया है। प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अब सरकारी कार्यालयों में 'ई-ऑफिस' (e-Office) प्रणाली को अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी नवीनतम निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को आगामी माह का वेतन तभी मिलेगा, जब वे डिजिटल माध्यम से अपना कार्य संपादित करेंगे।

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वेतन के लिए ई-ऑफिस सर्टिफिकेट हुआ अनिवार्य
अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) संजय प्रसाद द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सचिवालय से लेकर तहसील और विकास खंड स्तर तक सभी कार्यालयों को 'पेपरलेस' बनाना अनिवार्य है। अब समस्त कार्यालयाध्यक्षों और आहरण-वितरण अधिकारियों (DDO) को एक विशेष प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस प्रमाण पत्र में यह पुष्टि करनी होगी कि उनके अधीन कार्यरत सभी कर्मियों (चतुर्थ श्रेणी और वाहन चालकों को छोड़कर) द्वारा केवल ई-ऑफिस पर ही कार्य किया जा रहा है। यह सर्टिफिकेट जमा होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों का वेतन जारी किया जा सकेगा।

ऑफलाइन फाइलों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सरकारी दफ्तरों के भीतर या एक विभाग से दूसरे विभाग के बीच होने वाला पत्राचार केवल डिजिटल माध्यम से होगा। ऑफलाइन पत्रावलियों के व्यवहार को आदेशों का उल्लंघन माना जाएगा। यदि किसी कार्यालय में ई-ऑफिस का क्रियान्वयन नहीं पाया जाता है, तो इसके लिए संबंधित कार्यालयाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानते हुए उनके विरुद्ध दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशिक्षण के बावजूद लापरवाही पर नाराजगी
डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए नोडल संस्था UPLC द्वारा फरवरी 2025 से ही ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई विभागों में अब भी ऑफलाइन फाइलों का उपयोग देखा जा रहा है। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि ट्रेनिंग के बाद अब किसी भी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस निर्णय से न केवल फाइलों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी कार्यप्रणाली में अभूतपूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। उत्तर प्रदेश अब देश का ऐसा राज्य बनने की ओर अग्रसर है जहाँ 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का सपना धरातल पर उतरेगा।

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