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UP में पंचायत चुनाव के लिए ऐसे मिल रहे संकेत : समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को आज मिल सकती है मंजूरी, योगी कैबिनेट पर नजर

यूपी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर योगी सरकार आज बड़ा कदम उठा सकती है। कैबिनेट बैठक में 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जो ओबीसी आरक्षण की दिशा तय करेगा।

 
 

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का होगा गठन

कैबिनेट बैठक में आज लगेगी मुहर

सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट का पालन

सेवानिवृत्त जज होंगे आयोग के अध्यक्ष

लखनऊ में बनेगा आयोग का मुख्यालय

 उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट के बीच राज्य सरकार एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रशासनिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में लंबे समय से बहुप्रतीक्षित 'उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर आयोजित होने वाली कैबिनेट की अहम बैठक में पंचायतीराज विभाग के इस विशेष प्रस्ताव को हरी झंडी (स्वीकृति) मिल सकती है। इस फैसले के बाद प्रदेश की चुनावी राजनीति और आरक्षण के समीकरणों को एक नई दिशा मिलेगी।

सर्वोच्च न्यायालय के 'ट्रिपल टेस्ट' के अनुरूप होगी पूरी प्रक्रिया
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार सूबे में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा निर्धारित 'ट्रिपल टेस्ट' के कड़े नियमों के अनुरूप ही संपन्न कराना चाहती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य में चुनावों के दौरान दी जाने वाली ओबीसी (OBC) आरक्षण व्यवस्था को कानूनी रूप से इतना सुदृढ़ और पारदर्शी तैयार किया जाए, ताकि वह अदालत के समक्ष किसी भी न्यायिक चुनौती के सामने मजबूती से टिक सके। इसी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को मुकम्मल करने के क्रम में अब ग्रामीण निकायों के लिए अलग से 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' गठित करने का ठोस निर्णय लिया गया है।

क्या होगा इस प्रस्तावित आयोग का मुख्य कार्य?
यह प्रस्तावित समर्पित आयोग मुख्य रूप से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक सामाजिक-शैक्षणिक स्थिति, उनके सटीक प्रतिनिधित्व और उनकी जनसंख्या के सही अनुपात का गहन जमीनी अध्ययन करेगा। यह आयोग पंचायतवार पिछड़े वर्गों की वर्तमान स्थिति और अद्यतन (अपडेटेड) आंकड़ों का बारीकी से वैज्ञानिक विश्लेषण करने के बाद अपनी महत्वपूर्ण संस्तुतियां (सिफारिशें) राज्य सरकार को सौंपेगा। आयोग की इसी विस्तृत और निष्पक्ष रिपोर्ट के आधार पर ही आगे चलकर त्रिस्तरीय व्यवस्था में ओबीसी आरक्षण का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा।

आयोग में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संभालेंगे कमान
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस विशेष समर्पित आयोग में कुल 5 सदस्य शामिल किए जाएंगे। आयोग के कामकाज को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा, जिनके पास कानून और प्रशासनिक मामलों का लंबा अनुभव होगा।

नए आयोग को लेकर ऐसी है योजना
इस नवगठित आयोग के सुचारू संचालन और समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के लिए एक निश्चित प्रशासनिक ढांचा तय किया गया है। इस समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का मुख्य कार्यालय (प्रशासनिक मुख्यालय) प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थापित रहेगा। आयोग का पूरा कार्यकाल कुल छह माह (6 महीने) का निर्धारित किया गया है। साथ ही साथ आयोग को अपनी जांच, सर्वे, डेटा कलेक्शन और अध्ययन का काम पूरा करके तीन माह (3 महीने) के भीतर अपनी पहली अंतिम रिपोर्ट सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का कड़ा लक्ष्य दिया जाएगा।

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