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छत्रबली सिंह के भाई श्याम जी सिंह की खदान में मुंशी की मौत के बाद हंगामा

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों पहले भी इसी क्षेत्र में ऐसा ही हादसा हुआ था, जिससे खनन कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
 

चंदौली के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हैं छत्रबली सिंह


छत्रबली सिंह के भाई श्याम जी सिंह के नाम है खदान


 खदान में मुंशी की हुई मौत पर लगे तरह-तरह के आरोप


श्याम जी सिंह बोले- मेठ नंदेश यादव वहां कराता है काम


मृतक के परिजनों के साथ हो चुका है समझौता

चंदौली जिले के  पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह के भाई श्याम जी सिंह के नाम  मिर्जापुर के अहरौरा क्षेत्र में स्थित एक खदान में  एक दुखद दुर्घटना हुई, जिसमें खदान के मुंशी की पोकलैंड मशीन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों के अनुसार, मृतक का शव तत्काल खदान परिसर से हटाने की कोशिश की गई, जिस पर नाराज़ होकर ग्रामीणों ने खदान के मैनेजर को पकड़ लिया और घटना की जानकारी पुलिस को दी।

Chhattrabali Singh brother Shyam Ji Singh has mine Various allegations after Munshi death  Shyam Ji Singh foreman Nandesh Yadav
छत्रबली सिंह के भाई श्याम जी सिंह के नाम है खदान

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों पहले भी इसी क्षेत्र में ऐसा ही हादसा हुआ था, जिससे खनन कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में खनन माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं से मजदूरों में भय का माहौल है।

Chhattrabali Singh brother Shyam Ji Singh has mine Various allegations after Munshi death  Shyam Ji Singh foreman Nandesh Yadav
छत्रबली सिंह के भाई श्याम जी सिंह के नाम है खदान

इस मामले में खदान के पट्टा मालिक चंदौली के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबाली सिंह के भाई श्याम जी सिंह ने बताया कि मृतक मुंशी नशे की हालत में काम कर रहा था, जिसके कारण वह मशीन के पास फिसलकर गिर गया और दुर्घटना घटित हो गई। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। श्याम जी सिंह के अनुसार, खदान का पट्टा भले ही उनके नाम पर है, लेकिन खुदाई का काम रॉबर्ट्सगंज के मेठ नंदेश यादव की देखरेख में चल रहा था। मृतक भी उसी का मुंशी था।

उन्होंने बताया कि मेठ तथा मृतक के परिजनों के बीच आपसी समझौता हो चुका है और भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने पर मामला शांत कर दिया गया है। सिंह ने कहा कि उनका नाम केवल इसलिए आ रहा है, क्योंकि खदान उनके नाम पर है, जबकि संचालन और निगरानी मेठ द्वारा की जा रही थी।
 

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