वर्दीसंडा में 20 साल से विकास न होने पर फूटा गुस्सा: नाली और खड़ंजे के लिए ग्रामीणों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
धानापुर के वर्दीसंडा पश्चिम बस्ती में दो दशकों से नाली और खड़ंजा न बनने से नाराज ग्रामीणों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। निर्माण कार्य शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
वर्दीसंडा में नाली खड़ंजा भूख हड़ताल
दो दशक से विकास की बाट जोहते ग्रामीण
चारपाई पर मरीज ले जाने की मजबूरी
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
चंदौली जिले के धानापुर विकासखंड अंतर्गत वर्दीसंडा पश्चिम बस्ती में विकास कार्य न होने से गुस्साए ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। बस्ती में नाली और खड़ंजा निर्माण की पुरजोर मांग को लेकर गांव के लोगों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि पिछले दो दशकों से उनकी बस्ती में विकास के नाम पर एक भी ईंट नहीं रखी गई है, जिससे वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

दिवाकर रावण की अगुवाई में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन
गांव में मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी से परेशान होकर ग्रामीणों ने दिवाकर रावण के नेतृत्व में यह बड़ा आंदोलन शुरू किया है। भूख हड़ताल पर बैठे लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक संबंधित विभाग और प्रशासन मौके पर आकर निर्माण कार्य शुरू नहीं करवाता, तब तक उनका यह प्रदर्शन और भूख हड़ताल लगातार जारी रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब झूठे आश्वासनों के झांसे में बिल्कुल नहीं आने वाले हैं।

बीमार पड़ने पर मरीज को चारपाई पर लादकर ले जाने की मजबूरी
प्रदर्शन में शामिल कंचन देवी ने बस्ती की दर्दभरी सच्चाई बयां करते हुए बताया कि गांव में सड़क और नाली की समस्या बरसों से जस की तस बनी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी बार-बार शिकायत के बावजूद इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थिति इतनी ज्यादा दयनीय है कि अगर बस्ती में कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाता है, तो उसे चारपाई पर लादकर लगभग एक किलोमीटर दूर मुख्य रास्ते तक ले जाना पड़ता है।
आजादी के सालों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं लोग
गांव के लोगों का कहना है कि देश की आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी उन्हें पक्की सड़क और नाली जैसी बेहद आम व बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो सकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक बार-बार गुहार लगाई, लेकिन जब किसी ने उनकी सुध नहीं ली, तो थक-हारकर उन्हें भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम का सहारा लेना पड़ा। जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर भरी हुंकार
इस भूख हड़ताल में गांव की महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कंचन देवी, मालती देवी, परमशिला देवी, सुनीता देवी, दिवाकर रावण, संदीप, गोलू कुमार, छोटू लाल, हर्ष, अर्जुन, अंकित, अरविंद, मोनू, सागर, चंदा, निशा, सूरज, नीतीश, सतीश, सुनील, राकेश, अविनाश, चंद्रिका, प्रीतम, जितेंद्र, आकाश भारती, सीमा, गीता, मुराही, मीणा और लक्ष्मण समेत सैकड़ों ग्रामीण अपनी मांगों के समर्थन में पूरी एकजुटता के साथ धरने पर डटे हुए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कब तक संज्ञान लेता है।
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