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चंदौली जिले में हो रही है वसूली किसी को मालूम है क्या, नहीं तो पढ़ लीजिए यह खबर
चंदौली जिले में विभिन्न आयोजनों के नाम पर पैसे की वसूली कोई नई बात नहीं है। सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के नाम पर अक्सर कई जगहों से सरकारी कर्मचारी व अधिकारी पैसे की वसूली करके भव्य आयोजन को अंजाम देने की कोशिश करते हैं
 

चंदौली जिले में हो रही है वसूली

चंदौली जिले में विभिन्न आयोजनों के नाम पर पैसे की वसूली कोई नई बात नहीं है। सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के नाम पर अक्सर कई जगहों से सरकारी कर्मचारी व अधिकारी पैसे की वसूली करके भव्य आयोजन को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। कुछ ऐसी ही तैयारी आजकल बेसिक शिक्षा विभाग में की जा रही है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ खास किस्म के लोग शिक्षकों पर दबाव बनाकर मनमाने तरीके से वसूली कर रहे हैं।

 आपको बता दें कि चंदौली जिले में जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जाना है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी अक्सर इस कार्यक्रम के लिए कम बजट का रोना रोते हैं और शिक्षकों पर दबाव बनाकर हर साल इसके लिए वसूली करते हैं। इस वसूली का उद्देश्य यह नहीं होता कि क्रीड़ा प्रतियोगिता को और भव्य बनाया जाए और खिलाड़ियों और छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधा और पुरस्कार दिए जाएं, बल्कि यह वसूली इसलिए होती है कि विभाग जिले के आला अधिकारियों और अपने चहेते राजनेताओं के लिए अच्छे-अच्छे गिफ्ट और उनके मनपसंद की चीजें भेंट में दे सकें। लंबा चौड़ा टेंट और तंबू लगाया जाए और नेता जी के भाषण के लिए बेहतरीन साउंड सिस्टम और भीड़ की व्यवस्था की जाए। बच्चों को सूखी पूड़ी सब्जी तो साहब लोगों को काजू की बर्फी खिलायी जा सके। बच्चों को पतले कागज पर सर्टिफिकेट तो साहब व नेता जी को हजारों रुपए वाला मोमेंटो दिया जा सके।


 हालांकि यह सारा काम अधिकारी अपने कुछ खास मातहतों को लगाकर अपना भौकाल बनाने के लिए करते हैं। इसमें उनको जिले के आला अधिकारियों का संरक्षण भी प्राप्त होता है। इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं होता है और न ही वसूली का कोई खास फिक्स रेट होता है। इसलिए इसमें कुछ लोग अपनी जेब भी भरने का काम करते हैं।

यह चल रहा है रेट

 आपको बता दें कि अबकी बार चंदौली जिले में जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन चहनिया ब्लॉक के बाल्मिकी इंटर कालेज में किया जा रहा है और इसके लिए चहनिया ब्लॉक के शिक्षकों से वसूली का रेट फिक्स हो गया है। सोशल मीडिया में वायरल अध्यापकों के मैसेज के अनुसार अबकी बार चहनिया ब्लॉक के हेड मास्टर से 3000 रुपए और अध्यापकों से 2000 रुपए वसूले जा रहे हैं। इसके अलावा जिले के अन्य ब्लाकों से मनमाने तरीके से सहयोग राशि की वसूली जोरशोर से की जा रही है। कहीं पर 200 से लेकर 500 रुपए और कहीं पर 500 से लेकर 1000 रुपए तक का चंदा लगा दिया गया है और इसको वसूलने के लिए संकुल प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है।

कहा जा रहा है कि संकुल प्रभारी पढ़ाने लिखाने का काम छोड़छाड़ कर केवल दिनभर अलग-अलग इलाकों में भ्रमण करने का काम कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा चंदा वसूल कर साहब की झोली में डालना चाहते हैं, ताकि उनका ग्राफ हमेशा उनकी नजर में ऊंचा बना रहे। इसको लेकर शिक्षकों में अच्छा खासा विरोध है, लेकिन उनकी सुनने वाला कौन है। 

ऐसा कहते हैं शिक्षक

 शिक्षकों का कहना है कि अगर अपना भौकाल बनाना इतना ही जरूरी है तो अधिकारियों को अपनी जेब से अपना पैसा देना चाहिए। शिक्षकों पर जबरन वसूली का दबाव डालना अच्छी बात नहीं है। दस-दस हजार तो हर एबीएसए दे सकता है और पच्चीस-पचास हजार बेसिक शिक्षा अधिकारी दे सकते हैं। इसके बाद कुछ और चाहिए तो तमाम योजनाओं के कोआर्डिनेटर व विभागीय बाबू भी हैं, जो लाखों हर साल डकारते रहते हैं।


 एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हर साल इस तरह के आयोजन होते हैं और उनसे दबाव बनाकर पैसे वसूले जाते हैं। अगर कोई पैसे देने में आनाकानी करता है तो उसकी जांच पड़ताल शुरू करके उसके खिलाफ कार्यवाही कर दी जाती है। डर के मारे पैसे देना हम लोगों की मजबूरी है। हम शिक्षक हैं और हमें बेसिक शिक्षा विभाग के आला अफसरों की हर सही गलत बात माननी पड़ती है, जो बात नहीं मानेगा उसका या तो तबादला कर दिया जाएगा या तो किसी बहाने उसका निलंबन हो जाएगा। इसलिए हर कोई यह चाहता है कि हजार दो हजार देखकर अगर साहब खुश हो जाते हैं, तो यही सही।

शिक्षक नेता बोले

 एक शिक्षक नेता ने कहा कि अगर अधिकारियों को इस तरह के आयोजन के लिए पैसा वसूलना जरूरी है तो बाकायदा उनको एक रसीद छपवा लेनी चाहिए और रसीद काटकर ईमानदारी के साथ वसूली करनी चाहिए, ताकि पैसे का हिसाब किताब सबको पता रहे और जब चाहे तब इस पर नजर बनाए रखी जा सके। हमें पैसे देने में कोई एतराज नहीं है, क्योंकि यह शिक्षा विभाग के कार्यक्रम के आयोजन के लिए किया जा रहा है। लेकिन इसमें कुछ दलाल किस्म के लोग अपना जेब भरने का काम करते हैं और शिक्षकों के पैसे से अपना भौकाल टाइट करते हैं।

 आपको बता दें कि खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन पहले विद्यालय स्तर पर किया जाता है, उसके बाद वहां से चयनित बच्चे संकुल पर जाते हैं। संकुल पर से कुछ बच्चों का चयन ब्लॉक स्तर के लिए किया जाता है और ब्लॉक स्तर से सेलेक्ट हुए बच्चों को जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता के लिए भेजा जाता है। यहां पर आयोजन के बाद बच्चों को पुरस्कार दिया जाता है।

इस बारे में जानकारी के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई बार फोन किया गया, लेकिन रविवार को साहब ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।