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सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने राहुल गांधी का किया समर्थन, कहा- मामला जनता के वोट के अधिकार का

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने राहुल गांधी की इस पहल का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे जनता के वोट के अधिकार से जुड़ा है।
 

'वोट चोरी' का आरोप सही मान रहे विरोधी दल

वोटर अधिकार यात्रा से एक नया राजनीतिक मोर्चा बनाने का प्लान

भाजपा पर आरएसएस की निर्भरता का भी आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई 'वोटर अधिकार यात्रा' ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। यह यात्रा 'वोट चोरी' और 'एसआईआर' (SIR) जैसे मुद्दों को लेकर निकाली गई है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस यात्रा को समाजवादी पार्टी (सपा) और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों का समर्थन मिल रहा है, जो यह दर्शाता है कि यह मुद्दा विपक्ष के लिए एक संयुक्त मोर्चा बन सकता है।

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने राहुल गांधी की इस पहल का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर एक ऐसा मुद्दा है जो सीधे जनता के वोट के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर ने हर भारतीय नागरिक को वोट का अधिकार दिया था, लेकिन भाजपा 'वोट की चोरी' कर इस अधिकार से जनता को वंचित कर रही है। वीरेंद्र सिंह के अनुसार, यह यात्रा लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान है। उनका मानना है कि इस अभियान का उद्देश्य जनता को उन लोगों से सावधान करना है जो उनके वोट चुरा रहे हैं, और ऐसे लोगों को सबक सिखाने की अपील करना है।

वीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर आरएसएस पर निर्भरता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को अब अपने लोगों और यहां तक कि एनडीए के घटक दलों पर भी भरोसा नहीं रहा है। उनके अनुसार, भाजपा संवेदनशील पदों पर केवल आरएसएस से जुड़े लोगों को ही बिठाना चाहती है। वीरेंद्र सिंह ने यहां तक कहा कि भारत का संचालन भाजपा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर्दे के पीछे से कर रहा है। यह आरोप भाजपा और आरएसएस के संबंधों पर विपक्षी दलों के पुराने हमलों को फिर से हवा देता है।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। भास्कर जाधव ने कहा कि चुनाव आयोग हमेशा यह कहता रहता है कि 'यह नहीं हुआ, वह नहीं हुआ', लेकिन 65 लाख मतदाताओं को हटा दिया गया, इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि वे 65 लाख मतदाता कौन थे? जाधव ने कहा कि अगर यह मामला जनता की अदालत में जाता है और अगर कांग्रेस ने इसे उठाया है, तो इसका समर्थन किया जाना चाहिए।

'वोटर अधिकार यात्रा' और 'एसआईआर' पर उठे सवाल यह दर्शाते हैं कि विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर हैं। ये आरोप ऐसे समय में लगाए जा रहे हैं जब देश में कई राज्यों के चुनाव नजदीक हैं, और अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। भाजपा ने अभी तक इन आरोपों पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मुद्दा निश्चित रूप से आने वाले समय में राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। इस यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी और विपक्षी दल एक नए राजनीतिक नैरेटिव को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो सीधे जनता के अधिकारों से जुड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह यात्रा जनता के बीच कितना प्रभाव डालती है और क्या यह 2024 के चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन पाती है।

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