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अब तो इस पुल पर भी दौड़ने लगे हैं ओवरलोड बोल्डर व बालू वाले ट्रक, खामोश हैं अधिकारी

नेशनल हाइवे से सकलडीहा-चहनिया व गाजीपुर की ओर जाने वाली ओवरलोड गाड़ियां दिनभर सड़कों के किनारे खड़ी होकर इस बात का इंतजार करती हैं कि वह रात या तड़के सुबह पुलिस व यातायात विभाग की ढिलायी का फायदा उठा सकें। 
 

इस पुल की भार क्षमता जानने व समझने की जरूरत

कहीं पुल को डैमेज न कर दें ये ओवरलोडेड गाड़ियां

कौन बताएगा कि इन गाड़ियों का जाना-जायज या गलत

 चंदौली जिला मुख्यालय पर नेशनल हाईवे से सकलडीहा रोड की तरफ जाने वाले रेलवे ओवरब्रिज पर बोल्डर और बालू की लदी गाड़ियों के आने-जाने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है, यहां पर तैनात ट्रैफिक और पुलिस के होमगार्ड व सिपाही भी इन ट्रकों को रोकने में असफल साबित हो रहे हैं। तड़के सुबह और रात में धड़ल्ले से ये गाड़ियां नेशनल हाईवे से सकलडीहा की तरफ जाती हैं। जिससे रेलवे के इस पुल के डैमेज होने का खतरा भी दिखायी देने लगा है।

बताया जा रहा है कि नेशनल हाइवे से सकलडीहा-चहनिया व गाजीपुर की ओर जाने वाली ओवरलोड गाड़ियां दिनभर सड़कों के किनारे खड़ी होकर इस बात का इंतजार करती हैं कि वह रात या तड़के सुबह पुलिस व यातायात विभाग की ढिलायी का फायदा उठा सकें। या किस तरह से रात के अंधेरे में अपनी गाड़ियों को पुलिस से पार कराने की सेटिंग करके गाड़ी को इसपार से इस पार करा दें। 

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छोटी गाड़ियों व आम जनता की सुविधा के लिए काफी मशक्कत के बाद बने इस पुल को लोड को देखने व समझने की जरूरत है। इसलिए चंदौली जिला प्रशासन और यातायात विभाग के पुलिस अधिकारियों से इस बात के अनुरोध है कि कृपया इस पर नजर दौड़ाएं और देखें कि क्या यह गाड़ियां पुल की क्षमता के अनुरूप हैं या कहीं यह पुल भी कर्मनाशा नदी वाले पुल की तरह टूट तो नहीं जाएगा। अधिकारियों को इस तरह की गाड़ियों के आने-जाने पर नजर रखकर यह तय करना है कि कहीं ये पुल डैमेज तो नहीं होने जा रहा है।

Overloaded Trucks

आपको बता दें कि जनपद चंदौली में रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम की समस्या से निजात दिलाने और रेलवे की फ्रेट कॉरिडोर योजना के तहत  रेलवे का यह ओवरब्रिज बनाया गया था, ताकि इस पार से उस पार यात्री व सवारी गाड़ियों का आना जाना हो सके। लेकिन इस पर क्षमता से अधिक भार वाले गाड़ियों का आवागमन अगर इसी तरह से जारी रहा तो हो सकता है कि इस पुल पर संकट का बादल भी मंडराने लगें, क्योंकि यहां पर तैनात होमगार्ड की तैनाती पर्याप्त नहीं है। 

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माना जा रहा है कि पुलिस महकमा केवल एक होमगार्ड खड़ा करके अपनी भूमिका की इतिश्री कर ले रहा है। एक होमगार्ड के बस की बात नहीं है कि वह बालू और खनन माफियाओं द्वारा संचालित किए जा रहे रैकेट की गाड़ियों को रोक पाए।

 

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https://youtube.com/shorts/lNZWPatsSDo?feature=share

 



 

 स्थानीय लोगों ने कहा है कि यह सारा खेल पुलिस महकमें के कुछ वसूलीबाज सिपाहियों व  कुछ अधिकारियों के संरक्षण में खेला जाता है. वे राजनेताओं के दबाव के कारण इन गाड़ियों पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। इसीलिए इस तरह की चीजों पर चुपी साधे रहते हैं। लेकिन इस चुप्पी का खामियाजा चंदौली जनपद की जनता को भुगतना पड़ सकता है।
 

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